कमलनाथ की शिवराज सिंह को चुनौति 15 साल बनाम 15 माह पर चर्चा को तैयार

By दिनेश शुक्ल | Oct 03, 2020

भोपाल। ‘‘बढ़ा ही आश्चर्य है कि शिवराज सिंह अपने 15 वर्ष के शासनकाल का तो हिसाब नहीं देते, लेकिन वह मुझसे मेरी 15 माह की सरकार का हिसाब जरूर मांगते हैं। मुझे तो काम करने के लिए सिर्फ साढ़े 11 माह ही मिले। मैं शिवराज जी को खुली चुनौती देता हूं कि आ जाइये जनता के सामने, मैं मेरे साढ़े 11 माह का हिसाब जनता के सामने रख देता हूं, आप अपने 15 वर्ष के शासनकाल का हिसाब जनता के समक्ष रख दीजिए, जनता खुद फैसला कर लेगी।“ उक्त संबोधन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज देवास जिले के हाटपिपलिया में एक विशाल जनसभा के दौरान व्यक्त करते हुए कहा कि आप लोगों ने देखा है कि कैसे हमारी चुनी हुई सरकार को सौदेबाजी कर गिरा दिया गया। 

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पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस अवसर पर कहा कि इस सभा में उपस्थित विशाल जन सैलाब को देखकर मेरा खून बढ़ गया है, यह भीड़ सरकारी भीड़ नहीं हुई है, लाई हुई भीड़ नहीं है, यह तो अपनी मर्जी से आई हुई भीड़ है। शिवराज जी की सभाओं में अधिकारियों को भीड़ लाने के टारगेट दिए जाते हैं, आज बेचारे अधिकारी नौकरी बचाने के लिए शिवराज जी की सभाओं में भीड़ इकट्ठे कर रहे हैं। मैं आपको यह बताना नहीं चाहता हूं कि प्रदेश पर उपचुनावों का बोझ क्यों आया, यह आप सब भली भांति जानते हैं। चुनाव तो प्रजातंत्र का त्यौहार होता है क्या यह त्यौहार है? भाजपा ने प्रजातंत्र व संविधान के साथ खिलवाड़ किया। हमने वोटों से सरकार बनाई और इन्होंने नोटों से। बाबासाहेब आंबेडकर ने नेहरू जी के साथ मिलकर जिस संविधान की स्थापना की थी, उस सविधान के साथ इन्होंने खिलवाड़ किया, प्रदेश में बिकाऊ राजनीति की शुरुआत की। प्रदेश पर उपचुनाव का बोझ डाल दिया लेकिन भाजपा यह जान लें कि छोटा सौदा छुप जाता है लेकिन बड़ा सौदा छुपता नहीं।

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कमल नाथ ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि मुझे शिवराज जी ने अपने 15 वर्ष की सरकार के बाद कैसा प्रदेश सौंपा था। ऐसा प्रदेश जो किसानों की आत्महत्याओं में, बेरोजगारी में, भ्रष्टाचार में, सबसे ज्यादा मजदूर उत्पादन में, महिलाओं के अत्याचार में देश में नंबर वन था। आज शिवराज की 7 माह की सरकार में भी आप रोज देख रहे हैं कि महिलाओं के साथ किस प्रकार दरिंदगी व दुष्कर्म की घटनाएं घट रही है, इन 7 माह में भी मध्यप्रदेश महिलाओं पर अत्याचार के मामले में देश में नंबर वन बनता जा रहा है। इन्हें किसानों की आवाज सुनाई नहीं देती, नौजवानों का दुख नहीं दिखता, इनकी आंख नहीं चलती, इनके कान नहीं चलते, इनका तो सिर्फ मुंह चलता है। जिससे यह झूठ बोलते हैं, झूठ भी इतना बोलते हैं कि झूठ भी इनसे शर्मा जाता है।

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