कमलनाथ ने राज्यपाल को लिखा पत्र, कहा- विधायकों के बंदी रहने की स्थिति में शक्ति परीक्षण अर्थहीन

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 16, 2020

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को सुबह राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी पार्टी के विधायकों को भाजपा द्वारा कर्नाटक पुलिस के नियंत्रण में बेंगलुरु में ‘बंदी’ के रुप में रखा गया है और ऐसी स्थिति में सदन में शक्ति परीक्षण कराना अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक होगा। कमलनाथ में छह पृष्ठ के पत्र में लिखा है ‘‘ मैं यह स्मरण करना चाहूंगा कि 13 मार्च 2020 को आपसे मुलाकात के दौरान मैंने आपको अवगत कराया था कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के कई विधायकों को बंदी बना कर कर्नाटक पुलिस के नियंत्रण में रखकर उन्हें विभिन्न बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मैंने यह स्पष्ट किया था कि ऐसी परिस्थितियों में विधानसभा में किसी भी शक्ति परीक्षण का कोई औचित्य नहीं होगा और ऐसा करना पूर्ण रुप से अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक होगा। शक्ति परीक्षण का औचित्य तभी है जब सभी विधायक बंदिश से बाहर तथा पूर्ण रुप से दबावमुक्त हों।’’

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 175 के साथ साथ अनुच्छेद 163:1: का हवाला देते हुए कहा गया है कि राज्यपाल द्वारा विधानसभा को भेजे जाने वाले संदेश मंत्रिपरिषद द्वारा दी गई सलाह के अनुरुप ही होंगे। पत्र में लिखा गया है ‘‘राज्यपाल विधानसभा अध्यक्ष का मार्गदर्शक या परामर्शदाता नहीं है। राज्यपाल, अध्यक्ष से यह अपेक्षा नहीं कर सकता कि अध्यक्ष उस तरीके से सदन में कार्य करें जो राज्यपाल संवैधानिक दृष्टि से उचित समझता है। राज्यपाल तथा अध्यक्ष दोनों की अपनी अपनी स्वतंत्र संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं। विधानसभा राज्यपाल के नीचे काम नहीं करती। कुल मिलाकर राज्यपाल विधानसभा के लोकपाल की तरह काम नहीं कर सकते।’’ कमलनाथ ने पत्र में लिखा है कि राज्यपाल द्वारा विधानसभा को भेजे जाने वाले संदेश अनुच्छेद 163:1: के अनुसार ही हो सकते हैं। इस अनुच्छेद के अनुसार, ऐसे संदेश मंत्रिपरिषद, जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री है, उनकी सहायता और सलाह पर ही विधानसभा को भेजे जा सकते हैं।

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मुख्यमंत्री ने लिखा है ‘‘भारत का संविधान राज्यपाल को ऐसी शक्तियां नहीं देता है कि वह किसी राजनैतिक पार्टी की आंतरिक समस्या या विरोधी राजनैतिक दलों के मध्य विवाद को सुलझाने का काम करे। राज्यपाल द्वारा मासिक संदेश के माध्यम से राष्ट्रपति को उपरोक्त स्थितियों के बारे में वस्तुस्थिति बताने का कार्य केवल इस हद तक ही सीमित है कि वह राष्ट्रपति के ध्यान में राज्य की राजनैतिक स्थिति लाए।’’ मुख्यमंत्री ने आगे लिखा है, ‘‘मुझे इस बात का आश्चर्य है कि आपने 14 मार्च 2020 के पत्र में प्रथम दृष्टया यह मान लिया है कि मेरी सरकार ने बहुमत खो दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि आपने भाजपा से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ऐसा माना है। जबकि वास्तविकता यह है कि वर्तमान परिस्थितियों में यह समूह भाजपा की कैद में है।’’ उन्होंने लिखा है कि यह सार्वजनिक चिन्ता का विषय है कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के कई विधायकों को संभवत: रिश्वत देने, लालच देने अथवा निरोधित करने का कार्य किया गया है। अंत में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को लिखा, ‘‘मुझे इस बात का भी आश्चर्य है कि मुझे लिखे गए संदेश रुपी निर्देशों में आपने विधानसभा की कार्यप्रणाली से संबंधित बातों पर मुझसे अपेक्षा की है जो मेरे मत में विधानसभा के माननीय अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। मुझे आशा और विश्वास है कि महामहिम विधि और संविधान के अनुरुप ही आगे कार्य करेंगे।

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