By अभिनय आकाश | Sep 21, 2026
कर्नाटक विधानसभा का तीन दिन का विशेष सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा। इसमें राज्य के सामने मौजूद दो अहम मुद्दों पर चर्चा होगी: सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट। जहां सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां BJP और JD(S) कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का विरोध करने पर मोटे तौर पर सहमत दिख रही हैं, वहीं सूखे के मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष ने सरकार पर स्थिति को संभालने और किसानों को पर्याप्त राहत देने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने केंद्र से सहयोग न मिलने की बात कही है। यह विशेष सत्र इसलिए बुलाया गया है क्योंकि पिछले महीने हुए मॉनसून सत्र के दौरान विधानसभा सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट के पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाके पर केंद्र के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर राज्य की प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं कर पाई थी।
यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब कर्नाटक के कई इलाके सूखे की चपेट में हैं। अब तक 124 तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है और दूसरे इलाकों में भी आकलन का काम चल रहा है। रविवार को सकलेशपुरा में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट समेत लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए यह विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों के सदस्यों को अपनी राय रखने का मौका दिया जाएगा। शिवकुमार ने बताया कि कई जिलों के विधायकों और जन-प्रतिनिधियों के साथ पहले ही चर्चा हो चुकी है और उडुपी, चिकमगलूर, हासन और शिवमोग्गा जिलों में लोगों की राय भी ली गई है। उन्होंने कहा कि सरकार फैसला लेते समय प्रभावित इलाकों के निवासियों की समस्याओं पर भी विचार करेगी।