By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 13, 2026
तमिलनाडु के लिये कावेरी नदी का 12,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के विरोध में कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ता वी. नागराज के आह्वान पर कर्नाटक बंद पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। मांड्या में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए और कई जगहों पर एहतियातन लोगों को हिरासत में लिया गया जबकि बेंगलुरु और मैसूरु जैसे बड़े शहरी इलाकों में जनजीवन सामान्य रहा। कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के तमिलनाडु को पानी छोड़ने के निर्देशों के विरोध में वी. नागराज के नेतृत्व वाले कन्नड़ संगठनों के महासंघ ने बंद का आह्वान किया है।
कुलथी का इस्तेमाल उस वैकल्पिक फसल के प्रतीक के तौर पर किया गया जिसे पानी की कमी के कारण किसान मजबूरन धान की जगह उगाते हैं। एक प्रदर्शनकारी ने सरकार से अपील की कि वह तमिलनाडु को ‘‘पानी की एक बूंद भी न दे’’ और सीडब्ल्यूआरसी तथा सीडब्ल्यूएमए के आदेशों को न माने। प्रदर्शनकारियों ने पानी छोड़ने के निर्देशों को किसानों के लिए ‘‘मौत का फरमान’’ करार दिया और कावेरी विवाद में कर्नाटक के हितों की रक्षा करने में कथित तौर पर ‘‘नाकाम’’ रहने के लिए पिछली सरकारों की आलोचना की।
प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री डी. देवराज उर्स और एस. बंगारप्पा का भी जिक्र किया और राज्य सरकार से मांग की कि वह पानी के बंटवारे के निर्देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए। एक और प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि कावेरी विवाद पर कानूनी लड़ाई में हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद, अलग-अलग सरकारों ने इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला। मैसूरु में बंद का असर अधिकतर प्रदर्शनों तक ही सीमित रहा।
उपनगरीय बस अड्डा से बेंगलुरु, मंगलुरु और राज्य के अन्य हिस्सों के लिए बस सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं। दुकानों और होटलों सहित व्यावसायिक प्रतिष्ठान आम दिनों की तरह खुले रहे जबकि ऑटो और टैक्सी भी बिना किसी रुकावट के चलते रहे। पुलिस ने कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया जिन्होंने उपनगरीय बस अड्डा के पास बसों को रोकने की कोशिश की थी।
प्रदर्शनकारियों ने कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के खिलाफ नारे लगाए और मांग की कि तमिलनाडु को कावेरी का पानी न दिया जाए। ‘कर्नाटक सेना’ संगठन के जिला अध्यक्ष तेजस लोकेश गौड़ा ने कहा कि सरकार को कावेरी मुद्दे पर तमिलनाडु के दबाव में नहीं आना चाहिए। गौड़ा ने मांग की कि केंद्र सरकार कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मध्यस्थता करे और स्थायी समाधान खोजने के लिए दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाए।
उन्होंने कम बारिश वाले वर्षों के लिए पानी के बंटवारे का एक वैज्ञानिक फॉर्मूला तैयार करने की मांग की और मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।