By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 13, 2026
कर्नाटक सरकार ने राज्य द्वारा संचालित मंदिरों में मिलने वाले चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसरों में सीसीटीवी या वेब कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मुजराई विभाग के अधीन आने वाले मंदिरों में हुंडी यानी दान-पात्र के पैसों और गहनों की गिनती के दौरान हेरफेर या चोरी की शिकायतें मिलती रही हैं। इसी को रोकने के लिए अब सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्डेड फुटेज सर्वर पर सुरक्षित रखा जाएगा। इन कैमरों की लगातार निगरानी मुजराई विभाग के मुख्यालय के साथ-साथ उपायुक्त और उपमंडल अधिकारियों के कार्यालयों से की जाएगी।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मंदिरों में क्यूआर कोड लगाए जाएंगे जिसमें बैंक का आईएफएससी कोड और अन्य जरूरी जानकारी भी होगी। इसे मंदिर की लेखा प्रणाली के साथ सीधे जोड़ा जाएगा ताकि वित्तीय प्रबंधन पारदर्शी रहे। चोरी रोकने के लिए यह भी तय किया गया है कि कैमरों के लेंस को कपूर के धुएं या अन्य तरीकों से बाधित न किया जा सके इसके लिए विशेष वेब कैमरों का इस्तेमाल होगा और मुजराई विभाग के मुख्यालय में एक केंद्रीय सर्वर स्थापित किया जाएगा।
दान की गिनती की प्रक्रिया को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं। बड़े मंदिरों में हर हफ्ते और अन्य सक्रिय मंदिरों में हर दो हफ्ते में एक बार तहसीलदार की देखरेख में गिनती की जाएगी। गिनती के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी और तारीखें आधिकारिक कैलेंडर में पहले से तय की जाएंगी। सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं का मूल्य उसी दिन आंका जाएगा और उन्हें तुरंत जिला या सब-ट्रेजरी में जमा कराया जाएगा।
प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए चेहरा मिलान प्रणाली यानी फेस मैचिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। हुंडी खोलने से लेकर बैंक को नकदी सौंपने तक की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी जिसमें तारीख और समय का स्पष्ट उल्लेख होगा। खास बात यह है कि गिनती के काम में आम लोगों के बजाय केवल होमगार्ड, बैंक कर्मचारियों या सरकारी कर्मचारियों को ही लगाया जाएगा। किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित मंदिर अधिकारी और तालुक स्तर के अधिकारी सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे।