By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 24, 2022
बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को स्थायी मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है ताकि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा सरकारी नौकरियों की भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। अदालत ने कहा है कि उपयुक्त उम्मीदवारों को वंचित नहीं किया जाना चाहिए और पूरी ईमानदारी के साथ न्याय होना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे में यह आवश्यक है कि भर्ती के दौरान केपीएससी को अपना मेडिकल बोर्ड और विशेषज्ञ चुनने की खुली छूट नहीं दी जाये।
बाद में गौड़ा ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां न्यायमूर्ति बी वीरप्पा और न्यायमूर्ति बी रचैया की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने 18 अप्रैल, 2022 को गौड़ा की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में तथ्यों का पता लगाने के लिए मिंटो नेत्र चिकित्सा अस्पताल में मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया। अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट से पता चला कि याचिकाकर्ता वर्णांधता से पीड़ित नहीं है और मोटर वाहन निरीक्षक के पद के लिए योग्य है। उल्लेखनीय है कि वर्णांधता, आंखों का एक रोग है जिसमें रोगी को किसी एक या एक से अधिक रंगों का बोध नहीं हो पाता है।