कर्नाटक: राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मंत्री बी नागेंद्र का इस्तीफा स्वीकारा

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 30, 2026

कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बी. नागेंद्र का मंत्री पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार की सिफारिश पर नागेंद्र का इस्तीफा स्वीकार किया।

उन्होंने शुक्रवार को इस्तीफा देने की घोषणा की थी। यह घोषणा शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के विस्तार में उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने के महज 25 दिन बाद हुई। नागेंद्र ने घोटाले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने पार्टी और सरकार को होने वाली शर्मिंदगी से बचाने के लिए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है।

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने बल्लारी के विधायक नागेंद्र के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रखा था। विपक्ष ने हाल ही में राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र में भी व्यवधान डाला और उसे निर्धारित समय से तीन दिन पहले समाप्त कराने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद नागेंद्र ने अपना इस्तीफा औपचारिक रूप से शिवकुमार को सौंप दिया था।

शिवकुमार ने कहा था कि वह शनिवार को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद इस पर फैसला लेंगे। माना जा रहा है कि नागेंद्र ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगते हुए राज्यपाल को भेजे गए अनुरोध के बाद इस्तीफा देने का फैसला किया। बताया जाता है कि गहलोत ने केंद्रीय एजेंसी के इस अनुरोध पर राज्य सरकार को पत्र भी लिखा था।

भाजपा ने एक सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 10 दिवसीय पदयात्रा निकालने की घोषणा की है। इस दौरान पार्टी राज्य की कांग्रेस सरकार की कथित विफलताओं को उजागर करेगी और नागेंद्र के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाएगी। नागेंद्र ने जून 2024 में धन के गबन के आरोपों के बाद तत्कालीन सिद्धरमैया सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था।

इसके बाद उन्हें तीन अगस्त को के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल किया गया और योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले सिद्धरमैया सरकार में नागेंद्र के पास अनुसूचित जनजाति कल्याण, युवा सशक्तीकरण और खेल विभाग था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जुलाई 2024 में वाल्मीकि निगम घोटाले के मामले में कांग्रेस विधायक नागेंद्र को गिरफ्तार किया था।

बाद में बेंगलुरु की विशेष अदालत ने उसी साल अक्टूबर में उन्हें जमानत दे दी थी। इस मामले में ईडी और सीबीआई दोनों ने अपने आरोपपत्रों में नागेंद्र का नाम शामिल किया है।

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