कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर गतिविधियों से संबंधित सरकार की याचिका खारिज की

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 06, 2025

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें सरकारी परिसरों में निजी संगठनों की गतिविधियों पर प्रतिबंध से संबंधित शासनादेश पर रोक लगाने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति एस. जी. पंडित और न्यायमूर्ति गीता के. बी. की खंडपीठ ने सरकार को सलाह दी कि वह अपील दायर करने के बजाय एकल पीठ के समक्ष जाकर अंतरिम रोक हटाने का अनुरोध करे।

हालांकि, शासनादेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि आदेश के प्रावधान संगठन की गतिविधियों, विशेष रूप से उसके पथसंचलन पर प्रभाव डाल सकते हैं। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या 10 या इससे अधिक लोगों की किसी भी सभा को स्वतः “अवैध” करार दिया जा सकता है

पीठ ने पूछा, “यदि लोग साथ चलना चाहते हैं, तो क्या उन्हें रोका जा सकता है?” इसने सुझाव दिया कि राज्य सरकार स्पष्टीकरण के लिए एकल पीठ का ही रुख करे। राज्य के महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने सरकार की ओर से दलील दी कि यह आदेश केवल संगठित आयोजनों जैसे रैलियों और जुलूसों पर लागू होता है, न कि अनौपचारिक सभाओं पर।

उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही विरोध प्रदर्शनों के लिए फ्रीडम पार्क और खेल आयोजनों के लिए कंटीरवा स्टेडियम को निर्धारित स्थल घोषित कर चुकी है। शेट्टी ने कहा, “यह आदेश सार्वजनिक संपत्ति और व्यापक जनहित की रक्षा करने के लिए है।”

वहीं, प्रतिवादी संगठनों पुनश्चेतना सेवा संस्था और वी केयर फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक हरनहल्लि ने कहा कि सरकार की अपील विचार योग्य नहीं है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(बी) का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को केवल सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर ही सीमित किया जा सकता है।

हरनहल्लि ने कहा, “इस नियम के अनुसार तो क्रिकेट खेलने वाले समूह को भी रोज अनुमति लेनी पड़ेगी।” दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने एकल पीठ के अंतरिम स्थगन आदेश के खिलाफ सरकार की अपील खारिज कर दी। मुख्य याचिका पर सुनवाई 17 नवंबर को होनी है।

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