By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 16, 2022
नयी दिल्ली। छात्र कार्यकर्ताओं ने हिजाब पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को बुधवार को ‘निराशाजनक’ बताते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों की वर्दी में सामाजिक और धार्मिक प्रथाएं समाहित होनी चाहिए। उच्च न्यायालय ने 129 पन्नों के आदेश में कहा कि हिजाब इस्लाम में जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं है और परिसर में शांति, सद्भभावना एवं लोक व्यवस्था को बाधित करने वाले किसी भी तरह के कपड़े पर रोक लगाने के कर्नाटक सरकार के आदेश को बरकरार रखा। राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस वार्ता में कई मुस्लिम छात्राओं और कार्यकर्ताओं ने अदालत के फैसले पर बात की और अपनी मांगों को रखा।
अंसारी ने कहा, “मैं कहना चाहती हूं कि हम शिक्षा लेने के अपने अधिकार को हासिल करेंगे और अपनी पहचान भी बनाए रखेंगे। हम किसी एक को नहीं चुनेंगे।” उन्होंने कहा, “इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि मुस्लिम महिलाएं हिजाब पहनकर अगर किसी बैंक या किसी सार्वजनिक स्थान पर जाएंगी, तो उन्हें नैतिक पुलिसिंग का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो कौन जिम्मेदार होगा? केंद्र सरकार बेटी बचाओ की बात करती है लेकिन राज्य सरकार इसके खिलाफ जाती है।” वक्ताओं ने कहा कि वर्दी में भारत जैसे विविध देश में धार्मिक और सामाजिक प्रथाओं को शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वालों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएं।