By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 05, 2026
(फाइल फोटो सहित) बेंगलुरु, पांच सितंबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि राज्य के शिक्षक समाज में उनके योगदान के सम्मान के तौर पर अपने नाम से पहले ‘टीआर’ लगा सकते हैं। शिवकुमार ने शिक्षक दिवस के अवसर पर यह घोषणा की। यह चलन चिकित्सक के लिए ‘डॉ.’, इंजीनियर के लिए ‘ईआर’ और प्रोफेसर के लिए ‘प्रो’ जैसे पेशेवर संबोधनों की तरह होगा।
आज से कर्नाटक के शिक्षक गर्व के साथ अपने नाम के पहले ‘टीआर’ का इस्तेमाल कर सकते हैं।’’ इसे आजीवन सेवा का प्रतीक बताते हुए शिवकुमार ने कहा कि ‘टीआर’ केवल एक उपाधि नहीं है, बल्कि यह उन शिक्षकों के प्रति समाज की मान्यता को दर्शाता है, जिन्होंने दूसरों के जीवन को संवारने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। शिवकुमार ने छात्रों का मार्गदर्शन करने, उनकी गलतियां सुधारने और उन्हें खुद पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करने वाले शिक्षकों के प्रति आभार जताते हुए कहा, ‘‘जो समाज अपने शिक्षकों का सम्मान करता है, वह अपने भविष्य का सम्मान करता है।’’ विजयनगर जिले के कुदलिगी में ‘‘प्रजा सेवा अभियान’’ की शुरुआत के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के बाद राज्य सरकार ने शिक्षकों के पेशे के सम्मान के तौर पर उन्हें अपने नाम के पहले ‘‘टीआर’’ लगाने की अनुमति देने का फैसला किया है। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आज हम सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मना रहे हैं।
अन्य क्षेत्रों के पेशेवरों को उनके पेशे के आधार पर पहचान मिलती है। इसी तरह सरकार ने शिक्षकों को भी पेशेवर पहचान देने का फैसला किया है।’’ शिवकुमार ने कहा, ‘‘समाज दो तरह के लोगों को ईश्वर के समान मानता है—माता-पिता, जो हमें जन्म देते हैं और शिक्षक, जो जीवन में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। शिक्षा के माध्यम से सेवा करना ईश्वर की सेवा करने के समान है।
इसलिए हमने शिक्षकों को यह उपाधि देने का फैसला किया है।’’ उन्होंने कहा कि शिक्षण ऐसा पेशा है, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज को आकार देता और उसका मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि सैनिक, श्रमिक, शिक्षक और किसान राष्ट्र के स्तंभ हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमें उनका सम्मान करना चाहिए।
यह हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।