By नीरज कुमार दुबे | Aug 06, 2026
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों का अभियान लगातार और अधिक आक्रामक होता जा रहा है। एक ओर अनंतनाग में पुलिसकर्मी की हत्या के मुख्य आरोपी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादी मोहम्मद लतीफ भट पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों के मददगारों पर भी शिकंजा कसते हुए बारामूला और पुलवामा में दो ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने और उसके हर मददगार को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब घाटी में आतंकियों द्वारा नागरिकों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की घटनाओं पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही हैं। हाल ही में कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद आतंकियों और उनके नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया गया।
इसी रणनीति के तहत सुरक्षा बलों ने बारामूला और पुलवामा में आतंकियों के दो मददगारों को गिरफ्तार किया है। बारामूला के शीरी इलाके में पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीम ने वाहन जांच के दौरान ऐजाज अहमद गनाई को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से एक पिस्तौल, नौ एमएम के 10 कारतूस, एक मैगजीन और मोबाइल फोन बरामद किया गया। वहीं पुलवामा के राजपोरा क्षेत्र में तौसीफ अहमद डार को गिरफ्तार कर उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और आपत्तिजनक पोस्टर बरामद किए गए। दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
इस बीच श्रीनगर में आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के 37 सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार के रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य केवल आतंकियों का सफाया करना नहीं, बल्कि पूरे आतंकी नेटवर्क और उसके समर्थक तंत्र को जड़ से खत्म करना है ताकि जम्मू-कश्मीर के हर नागरिक को शांति, समानता और सम्मानपूर्ण जीवन मिल सके।
मनोज सिन्हा ने कहा कि पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक नए दौर की शुरुआत हुई है। उनके अनुसार पहले आतंक समर्थक तंत्र बेखौफ होकर काम करता था, लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है और विकास, सामाजिक न्याय तथा समान अवसरों का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को दी जा रही नौकरियां किसी अपने के खोने की भरपाई नहीं कर सकतीं, लेकिन यह इस बात का प्रतीक हैं कि देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी को डर और हिंसा से मुक्त भविष्य देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा, रोजगार और विकास के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाकर अलगाववाद और आतंकवाद की विचारधारा को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आतंकवाद के पीड़ित किसी भी परिवार को अब न्याय के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
बहरहाल, पुलिसकर्मी के हत्यारे पर घोषित 15 लाख रुपये का इनाम, आतंकियों के मददगारों की लगातार गिरफ्तारी और प्रशासन के सख्त संदेश से साफ है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां अब केवल आतंकियों का पीछा नहीं कर रहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही हैं। आतंक के खिलाफ यह बहुस्तरीय अभियान घाटी में शांति और स्थिरता स्थापित करने की दिशा में सरकार के सबसे बड़े प्रयासों में से एक माना जा रहा है।