भारत में घुसने का प्रयास कर रहा था पाकिस्तानी घुसपैठिया, तभी आ गये BSF जवान, उसके बाद जो हुआ...मजा आ गया

By नीरज कुमार दुबे | Jul 13, 2026

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी घुसपैठिये की नाकाम कोशिश ने एक बार फिर साफ कर दिया कि सीमा पार बैठे तत्व भारत की सुरक्षा को चुनौती देने की साजिशों से बाज नहीं आ रहे हैं। दूसरी ओर पिछले डेढ़ महीने से भी अधिक समय से चल रहा विशाल अभियान ऑपरेशन शेरुवाली इस बात का प्रमाण है कि आतंकवाद के बचे हुए नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए सुरक्षा बल लगातार मैदान में डटे हुए हैं। इसी बीच अलगाववादियों का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों के प्रकाशन और वितरण के मामले में हुई कार्रवाई ने यह संकेत भी दे दिया है कि अब केवल बंदूक उठाने वालों पर ही नहीं, बल्कि अलगाववाद की सोच फैलाने वाले हर माध्यम पर भी सख्त प्रहार किया जाएगा।

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इसके अलावा, सीमा पर लगातार हो रही ऐसी गतिविधियों के बीच सुरक्षा बलों का सबसे बड़ा अभियान भी पूरे दमखम के साथ जारी है। तेइस मई से शुरू हुआ ऑपरेशन शेरुवाली अब डेढ़ महीने से भी अधिक समय पार कर चुका है और इसे जम्मू-कश्मीर के सबसे लंबे लगातार चलने वाले आतंकवाद विरोधी अभियानों में गिना जा रहा है। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल संयुक्त रूप से इस अभियान को अंजाम दे रहे हैं। इसका मुख्य लक्ष्य राजौरी जिले के मंजाकोट क्षेत्र के दोरीमल और गंभीर मुगलान के घने जंगलों में छिपे संदिग्ध आतंकवादियों का पूरी तरह सफाया करना है।

हम आपको बता दें कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों और घने जंगलों में चल रहे इस अभियान के दौरान सुरक्षा बल हर संभव आधुनिक संसाधन का उपयोग कर रहे हैं। निगरानी के अत्याधुनिक उपकरण, मानवरहित विमान और खोजी कुत्तों की मदद से पूरे इलाके की लगातार तलाशी ली जा रही है। जंगलों के भीतर आतंकवादियों के संभावित ठिकानों को खंगाला जा रहा है और उनके भागने के सभी रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का स्पष्ट संदेश है कि सीमा पार से भेजे गए आतंकवादियों के लिए जम्मू-कश्मीर की धरती पर अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचेगा। कठुआ में घुसपैठ की नाकाम कोशिश और राजौरी में लगातार जारी व्यापक अभियान यह दिखाते हैं कि सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई अब एक साथ और पूरी ताकत के साथ चल रही है।

इसी बीच, जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों के महिमामंडन से जुड़ी पुस्तकों के मामले में भी जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। एक स्थानीय अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार तीन प्रकाशकों को दस दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। काउंटर इंटेलिजेंस इकाई ने सरकारी पुस्तकालयों तक पहुंची कुछ पुस्तकों में अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने वाली सामग्री मिलने के बाद जांच शुरू की थी। इसी जांच के तहत रविवार को तीनों प्रकाशकों को गिरफ्तार किया गया।

जांच के दायरे में आई विवादित पुस्तकों में हिलाल अहमद और संतोष मीणा द्वारा लिखित तथा जम्मू की ओबेराय बुक सर्विस द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक और सुशांत गिरी द्वारा लिखित तथा दिल्ली के अनुराग प्रकाशन द्वारा प्रकाशित दूसरी पुस्तक शामिल है। गिरफ्तार किए गए प्रकाशकों में ओबेराय बुक सर्विस के इंद्रपाल तथा नोएडा स्थित डोमिनेंट पब्लिशर्स के अमरदीप सिंह और गिरीश अरोडा शामिल हैं। तीनों को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां आगे की जांच के लिए दस दिन की पुलिस हिरासत मंजूर कर दी गई।

इससे पहले सरकार ओबेराय बुक सर्विस और डोमिनेंट पब्लिशर्स को काली सूची में डाल चुकी है। छह जुलाई को काउंटर इंटेलिजेंस की टीमों ने दोनों संस्थानों के परिसरों पर छापेमारी भी की थी। चार जुलाई को इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई उस समय और तेज हुई जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित किया, एक संविदा कर्मचारी को बर्खास्त किया और विवादित पुस्तकों की जांच के आदेश दिए। उन्होंने इन पुस्तकों की सामग्री को बेहद अनुचित बताया था।

बहरहाल, सीमा पर घुसपैठ की कोशिश हो, जंगलों में छिपे आतंकवादियों के खिलाफ लंबा अभियान हो या फिर अलगाववाद का महिमामंडन करने वाले प्रकाशनों पर कानूनी शिकंजा, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई अब हर मोर्चे पर एक साथ दिखाई दे रही है। संदेश साफ है कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाली हर साजिश का जवाब अब तेजी, सख्ती और पूरी तैयारी के साथ दिया जाएगा।

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