By अभिनय आकाश | Oct 30, 2026
केरल में एक जानलेवा कार दुर्घटना के मामले में, एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे को मिली जमानत रद्द करने की मांग वाली अभियोजन पक्ष की अपील पर सुनवाई शनिवार तक के लिए टाल दी गई है, क्योंकि अदालत को इसे दाखिल करने की प्रक्रिया में कुछ कमियां मिलीं। महिलाओं और बच्चों के लिए बनी विशेष अदालत ने अभियोजन पक्ष को इन गलतियों को सुधारने और सही की गई अपील फिर से दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने आवेदन को अपील के बजाय याचिका के रूप में दायर किया था। अदालत ने यह भी गौर किया कि इस आवेदन में नाबालिग का नाम उजागर कर दिया गया था।
इस मामले ने जज को भी जांच के दायरे में ला दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने केरल उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी है। उनका कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाबालिग बेटे ने मर्सिडीज-बेंज कार बाहर निकाली है। अपनी अर्जी में जज ने बताया कि उन्हें दुर्घटना के बाद आए एक फोन कॉल से ही इस हादसे के बारे में पता चला। पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत जज को आरोपी बनाया है। यह धारा किसी नाबालिग द्वारा किए गए अपराधों के लिए उसके अभिभावक या वाहन के मालिक की जिम्मेदारी तय करती है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच जिला अपराध शाखा (डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच) को सौंप दी गई थी। इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस को जज को आरोपी बनाने की अनुमति दे दी थी।