By अंकित सिंह | May 04, 2026
केरल विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों से पता चलता है कि सोमवार सुबह ईवीएम वोटों की गिनती तेज होने के साथ ही यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को निर्णायक बढ़त मिल गई है। पहले घंटे के भीतर ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बड़ी संख्या में सीटों पर बढ़त बना ली और अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल गया। शुरुआती रुझान यूडीएफ के पक्ष में मजबूत रुझान का संकेत देते हैं, जिससे निर्णायक जनादेश मिलने की संभावना बढ़ जाती है। मतगणना के और दौर जारी होने के साथ ही गठबंधन राज्य में सत्ता में वापसी की ओर मजबूती से अग्रसर दिख रहा है।
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि पार्टी कोई भी औपचारिक टिप्पणी करने से पहले चुनाव परिणामों का इंतजार करेगी, साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि मतदाता विपक्ष की विभाजनकारी और भ्रष्ट राजनीति को खारिज कर देंगे। टेलीविजन पर प्रसारित खबरों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) केवल एक सीट पर आगे है। यदि वाम मोर्चा केरल में हारता है, तो उसके पास देश का कोई भी ऐसा राज्य नहीं बचेगा, जहां वह सत्ता में हो। रुझानों में सत्तारूढ़ मोर्चे के कम से कम 12 मंत्री अपनी-अपनी सीट पर पीछे हैं। शुरुआती दौर में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कन्नूर जिले में अपने पारंपरिक गढ़ धर्मदम सीट पर पीछे हैं।
शुरुआती रुझानों के अनुसार वीणा जॉर्ज, एम. बी. राजेश, ओ. आर. केलू, आर. बिंदु, जे. चिंचुरानी, पी. राजीव, के. बी. गणेश कुमार, वी. एन. वासवन, वी. शिवनकुट्टी, वी. अब्दुरहीमन, के रामचंद्रन, ए. के. शशींद्रन और रोशी ऑगस्टीन पीछे हैं। टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार, एलडीएफ संयोजक टी. पी. रामकृष्णन भी कोझिकोड जिले की अपनी मौजूदा पेराम्ब्रा सीट पर पीछे थे। ऐसा प्रतीत होता है कि माकपा नीत सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर ने अहम भूमिका निभाई है। विजयन के नेतृत्व में यह सरकार लगातार दो कार्यकाल से सत्ता में थी।