राष्ट्र के लिए समर्पित था डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार का पूरा जीवन

By टीम प्रभासाक्षी | Apr 01, 2022

डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार का जन्म नागपुर के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में 1 अप्रैल 1889 को हुआ था। डॉ. हेडगेवार छोटे से ही क्रांतिकारी प्रवृति के थे और उन्हें अंग्रेजों से बहुत घृणा थी। केशव राव बलीराम हेडगेवार के पिता का नाम पं. बलीराम पंत हेडगेवार था और माता का नाम रेवतीबाई था। उनका का बचपन बड़े लाड़-प्यार से बीता। उनके दो बड़े भाई भी थे, जिनका नाम महादेव और सीताराम था।

1910 में जब डॉक्टरी की पढाई के लिए कोलकाता गये तो उस समय वहां देश की नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़ गये। 1915 में नागपुर लौटने पर डा. हेडगेवार कांग्रेस में सक्रिय हो गये और कुछ समय में विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव बन गये। 1920 में जब नागपुर में कांग्रेस का देश स्तरीय अधिवेशन हुआ तो उन्होंने कांग्रेस में पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता को लक्ष्य बनाने के बारे में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जो पारित नहीं हो सका। 1921 में कांग्रेस के असहयोग आन्दोलन में सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी और उन्हें एक वर्ष की जेल हुयी। डा. हेडगेवार तब तक काफी लोकप्रिय हो चुके थे। हेडगेवार की रिहाई पर स्वागत के लिए आयोजित सभा को मोतीलाल नेहरू और हकीम अजकल खां जैसे दिग्गज लोगों ने संबोाधित किया था।

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सन 1916 में डा. हेडगेवार कांग्रेस के अधिवेशन में शामिल होने के लिए लखनऊ गये। वे लखनऊ की युवा टोली के सम्पर्क में आये। बाद में डॉ. हेडगेवार का कांग्रेस से मोह भंग हुआ और नागपुर में संघ की स्थापना कर दी। दुनिया में हजारों संगठन रोज बनते हैं। कुछ दस साल जीवित रहते हैं, तो कुछ बीस साल। कुछ संस्थाएं इससे आगे भी चल जाती हैं, पर फिर वे कुर्सी और सम्पत्ति के विवाद में अपने उद्देश्य से भटक जाती हैं। कई बार तो वे घरेलू जागीर बनकर रह जाती हैं। पर डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार ने 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नामक जिस संगठन की नींव रखीं थी, वह एक ओर भारत के हर विकास खंड तक पहुंच चुका है, तो दूसरी तरफ दुनिया के जिन देशों में हिंदू आबादी है वहां भी विद्यमान है। हर आयु वर्ग और काम करने वालों में स्वयंसेवक विभिन्न संगठन और संस्थाएं बनाकर काम कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता हों या राजनीतिक जीव, सच्चाई तो यह है संघ का प्रभाव हर इंसान में है। तभी आज दुनिया के हर कोने में संघ से जुड़े व्यक्ति मिल जाएंगे जो इसकी तारीफों के पुल बांधते रहते हैं तो विरोधी भी दिन में एक बार संघ को गाली दिये बिना अपना खाना हजम नहीं करा पाते।

डॉ केशव राव बलीराम हेडगेवार 1925 से 1940 तक, यानि मृत्यु पर्यन्त तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक रहे। 21 जून 1940 को डा. हेडगेवार को नागपुर में निधन हुआ। इनकी समाधि रेशम बाग नागपुर में स्थित है, जहाँ इनका अंत्येष्टि संस्कार हुआ था। संघ आज जिस स्थिति में है उसके लिए डॉ. हेडगेवार ने अपना तन, मन और धन ही नहीं, बल्कि जीवन का क्षण-क्षण देकर जो कीमत चुकाई है उससे समाज के यह मूल्य स्थापित हुआ कि संगठनकर्ता हो तो डॉ. हेडगेवार जैसा हो।

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