140 KM दूर से दुश्मन को निशाना बनाएगा भारत का Khagantak 243 Glide Bomb, परीक्षण सफल होते ही China, Pakistan की बढ़ी टेंशन

By नीरज कुमार दुबे | Sep 03, 2026

दुश्मनों पर अब आसमान से कहर बरपाने की भारत की ताकत और बढ़ गई है। भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम ‘खगांतक-243’ का सफल परीक्षण किया है। 140 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम यह हथियार भारतीय लड़ाकू विमानों को दुश्मन के ठिकानों पर दूर से ही सटीक और घातक हमला करने की क्षमता देगा। 

क्या है खगांतक-243, जो दुश्मन के लिए बन सकता है नया खतरा?

हम आपको बता दें कि खगांतक-243 एक 300 किलोग्राम श्रेणी का एयरबोर्न लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि लड़ाकू विमान को लक्ष्य के ठीक ऊपर पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विमान सुरक्षित दूरी से इस हथियार को छोड़ सकता है और इसके बाद बम अपने पंखों और नियंत्रण सतहों की मदद से लक्ष्य की ओर ग्लाइड करेगा। यानी युद्ध की स्थिति में भारतीय लड़ाकू विमान दुश्मन के मजबूत एयर डिफेंस क्षेत्र में गहराई तक घुसने के जोखिम को कम करते हुए दूर से हमला कर सकते हैं। यही आधुनिक हवाई युद्ध की सबसे बड़ी जरूरत है। यानि दुश्मन पर हमला करो, लेकिन उसकी जवाबी मार की सीमा से बाहर रहो।

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रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 12,000 मीटर की ऊंचाई से छोड़े जाने पर खगांतक-243 की रेंज 140 किलोमीटर से अधिक हो सकती है। इसका डिजाइन भी खास है। इसमें एक बेलनाकार बॉडी, बीच में घूमने वाले ग्लाइड विंग और पीछे पांच नियंत्रण सतहें हैं, जो इसे लक्ष्य की दिशा में नियंत्रित करने में मदद करती हैं।

125 किलो विस्फोटक भराव, दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार

खगांतक-243 में Mk 81 जनरल-पर्पज ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगाया गया है, जिसमें करीब 125 किलोग्राम विस्फोटक भराव है। यह संयोजन इसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों, संरचनाओं और अन्य लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी हथियार बना सकता है। इस हथियार श्रेणी की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसका मॉड्यूलर डिजाइन है। यानी भविष्य में मिशन की जरूरत और ग्राहक की मांग के अनुसार अलग-अलग वारहेड और गाइडेंस कॉन्फिगरेशन विकसित किए जा सकते हैं। यही लचीलापन खगांतक श्रेणी को केवल एक हथियार नहीं, बल्कि भविष्य में विकसित होने वाली एक व्यापक प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता का आधार बना सकता है।

BEL और JSR Dynamics की स्वदेशी साझेदारी

साथ ही खगांतक-243 भारत के रक्षा उद्योग की साझेदारी का भी उदाहरण है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और JSR Dynamics ने मिलकर विकसित किया है। JSR Dynamics ने बम की बॉडी और नियंत्रण प्रणाली विकसित की है, जबकि BEL ने इलेक्ट्रॉनिक्स और गाइडेंस सबसिस्टम उपलब्ध कराए हैं। भारतीय वायुसेना पहले ही BEL को खगांतक-243 म्यूनिशन के लिए ऑर्डर दे चुकी है, हालांकि ऑर्डर की संख्या और अनुबंध की कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है। इसका प्रारंभिक फ्लाइट टेस्ट प्लेटफॉर्म Su-30MKI है और भविष्य में इसे वायुसेना के अन्य विमानों के साथ भी एकीकृत किए जाने की संभावना है।

चीन और पाक की तुलना में भारत का हथियार कितना मजबूत?

यहां एक सवाल उठता है कि क्या चीन और पाकिस्तान के पास भी ऐसे हथियार हैं? इस सवाल का जवाब हां है लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि चीन और पाकिस्तान के पास मौजूद ऐसे हथियारों की अपेक्षा भारत के हथियार गुणवत्ता और मारक क्षमता में कहीं आगे हैं। हम आपको बता दें कि चीन और पाकिस्तान के पास भी स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड हथियार मौजूद हैं, लेकिन खगांतक-243 भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की अपनी स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी क्षमता को मजबूत करता है। चीन के पास लंबे समय से LS सीरीज जैसे प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम मौजूद हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में LS परिवार को ऐसे हथियारों के रूप में वर्णित किया गया है, जिनमें पारंपरिक बमों को गाइडेंस और ग्लाइड किट के जरिए स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन हथियार में बदला जा सकता है। चीन इस क्षेत्र में लंबे समय से निवेश कर रहा है।

इसके अलावा, पाकिस्तान के पास भी H-2 और H-4 Stand-Off Weapons जैसे हथियार उपलब्ध हैं। H-4 की घोषित रेंज लगभग 120 किलोमीटर बताई गई है, हालांकि इसकी क्षमताओं और कॉन्फिगरेशन से जुड़े कई विवरण अलग-अलग रूप में सामने आते रहे हैं।

चीन और पाकिस्तान की अपेक्षा भारत के हथियार की विशेषता देखें तो सामने आता है कि भारत तेजी से अपनी स्वदेशी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को मजबूत कर रहा है। खगांतक-243 की 140 किलोमीटर से अधिक की रिपोर्टेड रेंज इसे पाकिस्तान के सार्वजनिक रूप से ज्ञात H-4 की घोषित 120 किमी रेंज से आगे रखती है।

बदल जाएंगे सामरिक समीकरण

इसके अलावा, खगांतक-243 का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रभाव यह हो सकता है कि भारतीय वायुसेना को दूर से सटीक हमला करने का एक और स्वदेशी विकल्प मिलेगा। सीमा के पास तैनात दुश्मन के एयर डिफेंस, सैन्य ठिकाने, लॉजिस्टिक केंद्र और महत्वपूर्ण संरचनाएं भविष्य के संघर्ष में अधिक खतरे में आ सकती हैं। 140 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला करने की क्षमता का अर्थ है कि लड़ाकू विमान लक्ष्य के ऊपर मंडराए बिना भी प्रहार कर सकता है। इससे विमान और पायलट का जोखिम कम हो सकता है तथा दुश्मन के लिए जवाबी कार्रवाई की चुनौती बढ़ सकती है।

देखा जाये तो खगांतक-243 सिर्फ एक नया बम नहीं है। यह उस दिशा में भारत की तेज रफ्तार का संकेत है, जहां युद्ध के मैदान में विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी और भारतीय उद्योग सीधे भारत की मारक शक्ति तैयार करेगा। भारतीय वायुसेना का सफल परीक्षण साफ संदेश देता है कि अब भारत सिर्फ दुश्मन की सीमा तक पहुंचने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि दूर आसमान से सटीक और घातक प्रहार करने की क्षमता को स्वदेशी ताकत के दम पर मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में खगांतक-243 जैसे हथियार भारत की हवाई रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और चीन से लेकर पाकिस्तान तक, दोनों मोर्चों पर भारत की स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को नई धार दे सकते हैं।

-नीरज कुमार दुबे

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