जनाजे में पहली बार एक साथ दिखे खामनेई के तीन बेटे, पढ़ी नमाज, मोजतबा आखिर कहां हैं?

By अभिनय आकाश | Jul 06, 2026

1989 से लेकर फरवरी 2026 तक यानी करीब 37 सालों तक ईरान की सत्ता और उसकी नीतियों को अपनी मुट्ठी में रखने वाले अयातुल्लाह अली खामनेई को आज अंतिम विदाई दी जा रही है। तेहरान की सड़कें आंसुओं और काले लिबास में अटी पड़ी है। लेकिन इस ऐतिहासिक जनाजे ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। कारण वो शख्स है जिसे यहां होना चाहिए था लेकिन वह गायब है। हम ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई की बात कर रहे हैं। पिता के ताबूत के पीछे पूरा देश चल रहा है। देश का राष्ट्रपति रो रहा है। लेकिन उत्तराधिकारी मोजतबा कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ है कि ईरान का सबसे ताकतवर शख्स आज पर्दे के पीछे छिपने को मजबूर है। इजराइल की खुफिया एजेंसियां मोसाद का खौफ है या फिर सच्चाई कुछ और? तेहरान का इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला उस नेता को आखिरी सलाम कर रहा है जिसने ईरान को मिडिल ईस्ट की एक बड़ी सैन्य ताकत बनाया। पूरे देश में सात दिन का राष्ट्रीय शोक है और अनुमान है कि शोक सभाओं में 1 करोड़ से ज्यादा ईरानी हिस्सा ले रहे हैं। युद्ध की विभीषिका के बाद यह पहला मौका था जब खामने के तीन बेटे मसूद, मेसम और मुस्तफा एक साथ सार्वजनिक मंच पर नजर आए। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित इन तस्वीरों ने सबको भावुक कर दिया। मसूद खामनेई अपने पिता के ताबूत के पीछे चलते हुए फूट-फूट कर रोते दिखे। वह बार-बार फिलिस्तीनी एकजुटता और क्रांतिकारी आदर्शों के प्रतीक रहे अपने कैफी यानी चिकदार स्कार्प से आंसू पोंछ रहे थे। लेकिन पश्चिमी मीडिया और दुनिया भर के सामरिक विशेषज्ञों की नजरें सिर्फ मोजतबा खामनेई को ढूंढ रही थी। मार्च में अपने पिता की मौत के बाद सुप्रीम लीडर की कुर्सी संभालने वाले मुस्तफा की यह गैर मौजूदगी अब एक बड़ा रहस्य बन चुकी है। पद संभालने के बाद आज तक मुस्तफा ना तो किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं ना ही राष्ट्र के नाम उनका कोई ऑडियो या वीडियो संदेश आया है। 

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खामेनेई ने अमेरिका से बातचीत को मंज़ूरी दी, लेकिन कुछ लोग सहमत नहीं

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने हाल ही में कहा था कि अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने मध्य पूर्व में युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ कूटनीतिक समझौता करने के फ़ैसले को मंज़ूरी दे दी है। उन्होंने "अल्पसंख्यक की इच्छा के आगे झुकने" से इनकार किया। हालांकि, ईरान के कट्टरपंथी खामेनेई के इस फ़ैसले से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक, सुप्रीम लीडर का अमेरिका पर भरोसा करना, और कूटनीतिक समझौते को मंज़ूरी देना, उनके स्वभाव के अनुरूप नहीं है। खबरों के अनुसार, उन्होंने तब तक शांति समझौते का विरोध करने की कसम खाई है जब तक कि मोजतबा खामेनेई खुद सामने न आएं या अपनी आवाज़ की कोई रिकॉर्डिंग जारी न करें। 

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क्या मोजतबा 9 जुलाई को होने वाले अंतिम संस्कार में शामिल हो पाएंगे?

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया, जो 4 जुलाई को शुरू हुई थी, अब अपने आखिरी चरण में है। यह जुलूस सोमवार सुबह तेहरान में शुरू हुआ और उम्मीद है कि मशहद में इमाम रज़ा की पवित्र दरगाह पर 9 जुलाई को होने वाले अंतिम संस्कार से पहले यह 10-12 घंटे तक चलेगा।

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