By रेनू तिवारी | May 09, 2026
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बढ़ती नजदीकियों ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक सैन्य समझौते और आपसी रक्षा संधि ने पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पुतिन की प्योंगयांग यात्रा और यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों की भागीदारी की खबरों ने इस गठबंधन को और भी आक्रामक बना दिया है। इस बदलती भू-राजनीतिक स्थिति ने न केवल मौजूदा बाइडन प्रशासन बल्कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक नई चुनौती पेश कर दी है, जिससे वैश्विक सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। इस 'शक्तिशाली धुरी' के उदय को दुनिया भर में एक बड़े रणनीतिक खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की वर्षगांठ के मौके पर भेजे गए इस संदेश में किम ने 2024 में हुए "व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि" का जिक्र किया।
आपसी रक्षा प्रावधान: किम ने इस संधि के तहत "अंतर-राज्यीय दायित्वों" को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस समझौते में एक प्रमुख प्रावधान यह है कि यदि किसी भी देश पर हमला होता है, तो दूसरा देश उसकी सैन्य सहायता करेगा।
रणनीतिक एकजुटता: उत्तर कोरियाई समाचार एजेंसी KCNA के अनुसार, किम ने पुतिन को आश्वासन दिया कि प्योंगयांग हर परिस्थिति में मॉस्को के साथ मजबूती से खड़ा है।
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की भूमिका चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पश्चिमी और यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार: उत्तर कोरिया ने रूस की सहायता के लिए कुर्स्क क्षेत्र में लगभग 14,000 सैनिक भेजे थे। इन सैनिकों को युद्ध के मैदान में भारी कीमत चुकानी पड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाई के दौरान 6,000 से अधिक उत्तर कोरियाई सैनिक मारे गए हैं।
यूक्रेन से बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे के बीच, रूस ने इस साल अपनी सबसे छोटी 'विजय दिवस' परेड आयोजित की। सुरक्षा कारणों से समारोह को काफी सीमित रखा गया।
लेख में यह भी महत्वपूर्ण है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस भीषण संघर्ष में एक अस्थायी राहत की उम्मीद जागी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद, दोनों देश 9 मई से 11 मई तक तीन दिवसीय संघर्ष विराम (Ceasefire) पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, किम का संदेश यह संकेत देता है कि इस अस्थायी शांति के बावजूद, उत्तर कोरिया और रूस का सैन्य गठबंधन भविष्य के लिए और अधिक मजबूत हो रहा है।
एक नई वैश्विक धुरी
किम जोंग उन का यह संदेश केवल एक बधाई पत्र नहीं, बल्कि पश्चिम को एक स्पष्ट संकेत है। रूस की सैन्य शक्ति और उत्तर कोरिया के जनशक्ति सहयोग ने दुनिया के सामने एक नई सैन्य धुरी पेश की है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति के समीकरण बदल सकती है।
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