किम धमकाते रहे, पुतिन-जिनपिंग बोल-वचन सुनाते रहे, बेपरवाह अमेरिका ने जो करना था कर डाला, ट्रंप आखिर चाहते क्या हैं?

By अभिनय आकाश | Mar 01, 2026

अमेरिका और इस्राइल की ईरान पर संयुक्त कार्रवाई ने वेस्ट एशिया को अस्थिरता में डाल दिया है। अमेरिका और इजरायल ने अपनेबयानों से साफ कर दिया था किइस बार जंग केवल प्रतीकात्मक नहीं होगी। हुआ भी कुछ ऐसा ही। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत हो गई। वहीं ईरान के साथ कई वर्ष तक कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध रखने वाले रूस, चीन, उत्तर कोरिया जैसे देश और किम जोंग उन, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग जैसे नेता केवल निंदा तक ही सीमित रह गए। लेकिन किसी भी तरह का प्रत्यक्ष सैन्य समर्थन नहीं दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह मौजूदा तनाव दिखाता है कि एक ओर तो पावर पोलिटिक्स में बड़े नेता खामोश या केवल बयानबाज़ी कर रहे हैं, दूसरी ओर 8 वॉर रुकवाने का क्रे़डिट लेने वाले ट्रंप का रुख बेहद सख्त और निर्णायक नजर आ रहा है। इस स्थिति ने वैश्विक राजनैतिक समीकरणों को फिर से चुनौती दी है और विश्व को एक नए संकट के कगार पर ला खड़ा किया है।

इसे भी पढ़ें: खामेनेई की मौत, Ayatollah Arafi बने ईरान के Interim Leader: क्या US-इजरायल से लेंगे बदला?

नॉर्थ कोरिया ने बताया राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन

उत्तर कोरिया ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के निरंतर हमले की निंदा करते हुए इसे "अवैध आक्रामकता" बताया और दावा किया कि इससे वाशिंगटन का गुंडागर्दी जैसा रवैया सामने आया है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी को दिए एक बयान में कहा कि दोनों देशों द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान पूरी तरह से अवैध आक्रामकता और संप्रभुता के उल्लंघन का सबसे घिनौना रूप हैं। प्योंगयांग ने कहा कि इन सैन्य कार्रवाइयों से दोनों सहयोगियों का बेशर्म और गुंडागर्दी जैसा आचरण झलकता है, जिन्होंने अपने स्वार्थी और वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सैन्य बल का दुरुपयोग किया है। उत्तर कोरिया और अमेरिका लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं, लेकिन वाशिंगटन ने हाल के महीनों में प्योंगयांग के साथ उच्च स्तरीय वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए प्रयास किए हैं, ताकि इस साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन के बीच संभावित शिखर सम्मेलन हो सके।

ट्रंप आखिर चाहते क्या है ?

ट्रंप क्या चाहते हैं ये ग्लोबल कूटनीति की सबसे अबूझ पहेली है। जब से वह अमेरिका में दूसरे टर्म में प्रेजिडेंट बने हैं, तब से उनकी नीतियों के कारण पूरा ग्लोबल ऑर्डर उथल-पुथल हो गया है। एक दिन वह ग्लोबल पीस की बात करते हैं और अगले दिन युद्ध लेकिन ईरान उनके अजेंडे में शुरू से ही है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। इस कारण पिछले दिनों वहां आंदोलन को सीधा समर्थन भी दिया था लेकिन आंदोलन लंबा नहीं चल सका। फिर ट्रंप ने डील के बहाने दबाव बनाया। दरअसल ट्रंप को लगता है कि अगर ईरान के साथ अपने हिसाब से डील कर ली तो ग्लोबल ऑर्डर में एक बड़ी लकीर खींच देंगे जिससे अमेरिका के अंदर से लेकर पूरे विश्व में उनका रुतबा बढ़ेगा।

प्रमुख खबरें

Allahabad High Court ने हमीरपुर में स्कूल सड़क के लिए Forest NOC देने का आदेश दिया

Raipur Police के खिलाफ ईसाई संगठन का मोर्चा, दुर्व्यवहार के आरोप में कार्रवाई की मांग

JPNIC Lucknow के संचालन और रखरखाव को UP Cabinet की मंजूरी, 30 साल की लीज पर दिया

Kurukshetra Murder: महिला ने तीन चाकुओं से की पति की हत्या, जांच जारी