KKR का Electric Bus सेक्टर में बड़ा दांव, 31 करोड़ डॉलर के Investment से बदलेगी तस्वीर

By Ankit Jaiswal | Mar 18, 2026

भारत में साफ और हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा निवेश सामने आया है, जिसने इलेक्ट्रिक बस सेक्टर में नई गति पैदा कर दी है। वैश्विक निवेश कंपनी केकेआर ने ऑलफ्लीट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का फैसला लिया है।

बता दें कि इस समझौते के तहत केकेआर करीब 31 करोड़ डॉलर तक का निवेश करेगी। मौजूद जानकारी के अनुसार इस निवेश के जरिए केकेआर ऑलफ्लीट में बहुमत हिस्सेदारी लेगी, जबकि पीएमआई इलेक्ट्रो में अल्प हिस्सेदारी हासिल करेगी। गौरतलब है कि यह भारत में केकेआर की जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पहली बड़ी पहल मानी जा रही है।

ऑलफ्लीट की स्थापना वर्ष 2022 में हुई थी और यह कंपनी बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और प्रबंधन पर काम कर रही है। बता दें कि कंपनी फिलहाल 5000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जो देश के कई प्रमुख शहरों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को मजबूत करेगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए स्वच्छ परिवहन की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इस निवेश से इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे शहरों में बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित हो सकेगी।

गौरतलब है कि इस साझेदारी के तहत निर्माण से लेकर संचालन और रखरखाव तक का पूरा मॉडल एक साथ विकसित किया जाएगा। पीएमआई इलेक्ट्रो पहले से ही इस क्षेत्र में काम कर रही है और उसकी तकनीकी क्षमता इस परियोजना को मजबूती देगी।

केकेआर के एशिया प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख अधिकारी नील अरोड़ा ने कहा कि भारत में परिवहन का विद्युतीकरण ऊर्जा परिवर्तन का अहम हिस्सा है और यहां बड़े स्तर पर विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं पीएमआई इलेक्ट्रो की मुख्य कार्यकारी अधिकारी आंचल जैन ने इसे कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

बता दें कि केकेआर इससे पहले भी दुनिया के कई देशों में ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्ट में निवेश कर चुकी है। मौजूद जानकारी के अनुसार यह निवेश भी उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।

गौरतलब है कि यह सौदा वर्ष 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि इसके लिए जरूरी नियामकीय मंजूरी मिलना बाकी है। कुल मिलाकर यह निवेश भारत में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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