Karl Marx Death Anniversary: जानिए उस महान विचारक को, जिसकी Ideology ने दुनिया का नक्शा बदल दिया

By अनन्या मिश्रा | Mar 14, 2026

जर्मनी के महान अर्थशास्त्री, इतिहासकार, राजनीतिक सिद्धांतकार, समाजशास्त्री, पत्रकार और क्रांतिकारी कार्ल मार्क्स का 14 मार्च को निधन हो गया था। वह जर्मन के अर्थशास्त्री, दार्शनिक और राजनीतिक सिद्धांतवादी थे। उन्होंने आधुनिक इतिहास पर गहरा प्रभाव डाला था। कार्ल मार्क्स ने कम्युनिज्म, समाजवाद और व्यापार के स्वभाव पर विचारों ने 20वीं शताब्दी की राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार देने का काम किया था। आज भी कार्ल मार्क्स के सिद्धांत राजनीतिक और आर्थिक विवादों पर प्रभाव डालते हैं।

जन्म और शिक्षा

जर्मनी के राइनलैंड क्षेत्र के ट्रायर नामक शहर में 05 मार्च 1818 को कार्ल मार्क्स का जन्म हुआ था। इनके पिता वकील और मां धनवान परिवार से थीं। मार्क्स को घर पर शिक्षा दी गई थी। जब वह 12 साल के थे, तो उन्होंने स्थानीय स्कूल में पढ़ना शुरू किया था। फिर बोन यूनिवर्सिटी और बर्लिन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। यहां पर उन्होंने इतिहास, दर्शन और अर्थशास्त्र पर ध्यान केंद्रित किया था। उन्होंने जेना यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की थी। मार्क्स ने वकालत की भी पढ़ाई की थी।

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राजनीतिक और आर्थिक विचार

कार्ल मार्क्स को समाजवाद के प्रणेता के रूप में जाना जाता है। मार्क्स की विचारधारा आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक बदलाव को लेकर थी। वह समाजवाद के जरिए आर्थिक विकास को समझते थे। उन्होंने राजनीतिक विचारों के बारे में काफी कम लिखा है। कार्ल मार्क्स ने अपने समय के सामाजिक और धार्मिक दबावों को उखाड़ फेंकने के लिए समाजवादी विचारधारा विकसित की थी।

कार्ल मार्क्स की विचारधारा का मूल तत्व था कि शक्ति न सिर्फ व्यक्तिगत या संस्थात्मक होती है। बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक होती है। मार्क्स इस बात को बताते थे कि समाज का आधार अपने काम करने वाले लोगों पर होता है, न कि उनके लोगों पर। इसलिए कार्ल मार्क्स ने समाज के सभी वर्गों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने की जरूरत को बताया था।

सिद्धांत

मार्क्स समाजवाद और साम्यवाद पर अपने सिद्धांतों के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना था कि पूंजीवादी व्यवस्था स्वाभाविक रूप से त्रुटिपूर्ण थी। जोकि अंतत: अपने ही पतन की वजह बनेगी। उनका मानना था कि शासक वर्ग ने मजदूर वर्ग का शोषण किया और यह शोषण एक क्रांति की तरफ ले जाएगा। जहां पर मजदूर वर्ग पूंजीपति वर्ग को उखाड़ फेंकेगा। साथ ही एक समाजवादी समाज की स्थापना करेगा।

मृत्यु

वहीं 14 मार्च 1883 को काल मार्क्स का निधन हो गया था।

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