प्रकृति से है प्यार तो बागवानी को बनाएं कमाई का जरिया

By वरूण क्वात्रा | May 12, 2020

प्रकृति की गोद में रहने का अपना एक अलग ही आनंद है। कंप्यूटर की किट−किट और डेडलाइन्स से दूर रहकर अगर आप नेचर संबंधित एक सुखद कॅरियर की तलाश में हैं तो आप हार्टिकल्चर अर्थात बागवानी में अपना भविष्य तलाश सकते हैं। हार्टिकल्चर वास्तव में एग्रीकल्चर का ही एक छोटा स्वरूप है। जहां एग्रीकल्चर में बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, वहीं बागवानी में इसे छोटे स्तर पर किया जाता है। अगर आपको भी प्रकृति के करीब रहना पसंद है तो आप हार्टिकल्चर में अपना कॅरियर बनाएं। तो चलिए विस्तार से जानते हैं इस बारे में−

क्या है हार्टिकल्चर

हार्टिकल्चर वास्तव में आर्ट और विज्ञान का एक अद्भुत मिश्रण है। जिसमें फल, सब्जियों, मसालों, फूलों, औषधीय व सुगंधित फूलों की खेती की जाती है। बागवानी के क्षेत्र में ना सिर्फ परिवेश का सौंदर्यीकरण शामिल है, बल्कि पौधों और उनके महत्व का अध्ययन भी शामिल है। बागवानी में पौधों के फसल उत्पादन से लेकर मिट्टी की तैयारी, पौधे की प्रजनन और आनुवंशिक इंजीनियरिंग, पौधे की जैव रसायन और पादप शरीर क्रिया विज्ञान आदि शामिल है।

योग्यता

इस क्षेत्र में आपकी शैक्षणिक योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार के बागवानी व्यवसाय में रूचि रखते हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश स्नातक स्तर से शुरू होता है। जिन उम्मीदवारों ने भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित / जीव विज्ञान / कृषि के साथ विज्ञान स्ट्रीम (कक्षा 12 वीं) में उत्तीर्ण किया है, वे विषय के रूप में बागवानी में स्नातक की डिग्री के लिए एक अलग विषय के रूप में या बीएससी कृषि विज्ञान विषय के रूप में चयन कर सकते हैं। डिप्लोमा कार्यक्रम करने के लिए एक ही मूल योग्यता आवश्यक है। छात्र बागवानी में बीएससी करने के बाद, बागवानी में एमएससी कर क्षेत्र में अपना आगे का अध्ययन जारी रख सकते हैं।

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पर्सनल स्किल्स

इस क्षेत्र में कॅरियर देख रहे छात्रों में प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना होनी चाहिए। इसके अलावा छात्रों में सीखने के लिए उत्साह और प्रेरणा देने की क्षमता, गहन एकाग्रता के साथ लंबे समय तक काम करना और एक उत्सुक विश्लेषणात्मक मन होना चाहिए। उनके भीतर पौधों में रोग के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने के लिए बागवानी विशेषज्ञों में व्यावहारिक क्षमता, अवलोकन की अच्छी शक्तियां होनी चाहिए। सामान्य तौर पर, बागवानी विशेषज्ञों को अपने आसपास की दुनिया के बारे में जानने और समस्याओं को हल करने में रचनात्मक होने की आवश्यकता होती है।


संभावनाएं

इस क्षेत्र. में भविष्य की चाह रखने वाले छात्रों के लिए सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं। आप बागवानी उद्योग, सरकारी या शैक्षणिक संस्थानों या फिर निजी क्षेत्रों में भी प्रवेश कर सकते हैं। बागवानी वैज्ञानिक कृषि व्यवसाय, आर्बरकल्चर (लकड़ी के पौधों की देखभाल और देखभाल), वनस्पति उद्यान, संरक्षण, फसल प्रबंधन, पुष्प डिजाइन, खाद्य रसायन, फल और सब्जी उत्पादन, उद्यान केंद्र, ग्रीनहाउस, मैदान प्रबंधन, परिदृश्य निर्माण में कई क्षेत्रों में काम करते हैं। आप सरकारी क्षेत्र में पार्क, सार्वजनिक उद्यान, सरकारी लॉन आदि का रखरखाव कर सकते हैं। या फिरएक बागवानी निरीक्षक, फल और सब्जी निरीक्षक, कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण सहायक, जिला बागवानी अधिकारी / जिला कृषि अधिकारी, विपणन निरीक्षक, फार्म पर्यवेक्षक, अनुभाग अधिकारी और कृषि निरीक्षक के रूप में काम कर सकते है। इस क्षेत्र में ग्रेजुएट्स व पोस्ट ग्रेजुएट्स के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एसोसिएट प्रोफेसर या तकनीकी सहायक के रूप में काम किया जा सकता है। वहीं अगर आप सेल्फ एम्प्लॉयमेंट चाहते हैं तो आप हॉर्टिकल्चर कंसल्टेंट या हॉर्टिकल्चर थेरेपिस्ट, फ्लोरल डेकोरेटर / फ्लोरिस्ट शॉप, फ्रूट / वेजिटेबल / फ्लावर ग्रोवर इत्यादि के रूप में कार्य कर सकते हैं। कोई भी फल−फूल, सब्जियां या फूल या फल उगाने के लिए हॉर्टिकल्चर फ़ार्म स्थापित करके बागवानी उद्यमी बन सकता है।

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आमदनी

एक हार्टिकल्चरिस्ट की आमदनी उनकी शिक्षा, स्पेशलाइजेशन व रोजगार की भौगोलिक स्थित पिर निर्भर करता है। सार्वजनिक क्षेत्र की तुलना में निजी क्षेत्र में बागवानी पेशेवरों का वेतन अधिक है। नए स्तर पर, बागवानी में वेतन 8,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये प्रति माह तक हो सकता है। क्षेत्र में दो से तीन साल के अनुभव के बाद, प्रति माह 20,000 रुपये तक कमा सकते हैं। बागवानी निरीक्षक (संबंधित राज्य या केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त) 7,000 रुपये से शुरू होता है और अनुभव और सेवा के कुल वर्षों के आधार पर 17,000 रुपये तक जाता है। जिला बागवानी अधिकारियों को 20,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन मिलता है। बागवानी वैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों का वेतन 18,000 से 25,000 रुपये के बीच है।

प्रमुख संस्थान

देशभगत यूनिवर्सिटी, पंजाब

नालंदा कॉलेज ऑफ हार्टिकल्चर, नालंदा

श्रीराम कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, महाराष्ट

हार्टिकल्चरल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, तमिलनाडु

आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना

वरूण क्वात्रा

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