भारत विरोधी और कट्टर इस्लाम समर्थक इल्हान उमर, हर जगह इस्लामोफोबिया आता है नजर, जिनके PoK जाने पर बैकफुट पर आया US

By अभिनय आकाश | Apr 22, 2022

साल 2021 दिसंबर का महीना अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए एक बिल को मंजूरी दी। इस बिल को डेमोक्रेटिक सांसद जिन पर रिपब्लिकन पार्टी की ओर से इस्लामिक एजेंट होने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं ने पेश किया था। मुस्लिम सांसद की तरफ से पेश की गई इस बिल में भारत को भी चीन और म्यांमार की श्रेणी में डालने की वकालत की गई थी। हालांकि, ऐसा हो नहीं पाया था। ये बिल पेश करने वाली अमेरिका की मुस्लिम महिला सांसद दुनिया भर में 'इस्लामोफोबिया' से जुड़े मामलों पर अपनी राय देने के लिए मशहूर हैं। इल्हान उमर को स्वघोषित तौर पर पूरी दुनिया के मुस्लिमों के मानवाधिकारों का सबसे बड़ा रक्षक माना जा सकता है। इसके साथ ही उनके बयानों की वजह से वो कभी अपने ही देश के राजनेताओं तो कभी सरकार के लिए भी मुसीबत का सबब बन जाती हैं। इस सांसद ने 2019 में एक बार खुद के लिए कहा था- मैं केवल इसलिए विवादास्पद हूं क्योंकि लोग विवाद चाहते हैं। बीते दिनों एक खबर आई कि अमेरिकी कांग्रेस की नेता ने पाकिस्तान द्वारा जबरन कब्जाए गए कश्मीर क्षेत्र का दौरा किया। मसला भारत की अखंडता से जुड़ा था तो इस पर फटाफट प्रतिक्रिया भी आ गई और भारत ने इस कदम को लेकर जमकर लताड़ भी लगाई। आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल के रूप में अमेरिका की तरफ से बयान आया और इस दौरे को सांसद का निजी दौरा बताया। इसके साथ ही इससे पूरी तरह किनारा भी कर लिया। हम कट्टर इस्लाम समर्थक, भारत विरोधी और अल्पसंख्यक समाज को लेकर डबल स्टैंडर्ड अपनाने वाली अमेरिकी कांग्रेस की नेता इल्हान उमर के बारे में बात कर रहे हैं। आज के इस विश्लेषण में बताएंगे की कौन हैं इल्हाना उमर, कैसे हमेशा वो अपने बयानों की वजह से विवादों में रहती हैं और ताजा विवाद क्या है? 

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कश्मीर और मोदी सरकार को लेकर उगला जहर

21 अप्रैल के दिन खबर आई कि अमेरिकी कांग्रेस की महिला सांसद इल्हान उमर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का दौरा किया।  इल्‍हान ने कहा कि अमेरिका में सत्‍ता के केंद्रों में कश्‍मीर मामले की उतनी चर्चा नहीं हुई जितनी की उसको जरूरत थी। इल्‍हान ने भारत में मुस्लिमों के कथित मानवाधिकार उल्‍लंघन के मुद्दे पर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उमर ने कहा, 'कश्‍मीर के सवाल पर हमने विदेशी मामलों की समिति के सामने कमिटी सुनवाई की है ताकि मानवाधिकार के उल्‍लंघन की खबरों और मोदी सरकार से मुस्लिम विरोधी बयानबाजी और इससे होने वाले मानवाधिकारो के उल्‍लंघन जैसे ज्‍यादा बड़े मुद्दे पर बात की जा सके।' उन्‍होंने कहा, 'मैं यह नहीं समझती हूं कि (कश्‍मीर) पर उतनी ज्‍यादा चर्चा नहीं हुई है, जितनी उसको जरूरत है।' उन्‍होंने कहा कि इस यात्रा के बाद यह बदलेगा और कश्‍मीर पर और ज्‍यादा चर्चा होगी। 

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भारत का जवाब

इल्हान उमर के दौरे की भारत ने कड़ी निंदा की। भारत ने इसे क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कदम संकीर्ण सोच वाली राजनीति बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हमने देखा है कि इल्हान उमर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया है, जिस पर वर्तमान में पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि अगर कोई ऐसी राजनीतिज्ञ अपनी संकीर्ण मानसिकता को प्रदर्शित करती हैं, तब यह उनका काम है। उन्होंने कहा कि लेकिन इस क्रम में हमारी क्षेत्रीय अखंडता एवं सम्प्रभुता का उल्लंघन होता है तब हम समझते हैं कि यह यात्रा निंदनीय है।

अमेरिका की सफाई

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की उमर की यात्रा की भारत द्वारा निंदा किये जाने के कुछ घंटे बाद की सफाई दी। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के काउंसलर डेरेक चॉलेट ने कहा। ये एक अनौपचारिक व्यक्तिगत यात्रा है और यह संयुक्त राज्य सरकार की ओर से किसी भी नीति परिवर्तन का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है कि जब उमर ने भारत के भड़काने वाला रवैया अपनाया हो, अतीत में भी वो ये काम कई बार कर चुकी हैं। लेकिन अपने देश में भी वो एक विवादास्पद शख्सियत बनी हुई है।

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कौन है इल्हान उमर ?

40 साल की इल्हान सोमालियाई अमेरिकी राजनेता हैं जो साल 2019 से मिनिसोटा में चुनाव जीतकर हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में आई थी। वो अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली दो मुस्लिम महिला सांसदों में से एक हैं। अमेरिकी संसद में पहुंचने वाली वो पहली सोमालियाई अमेरिकी नागरिक भी हैं। मूल रूप से वो अफ्रीका की नागरिक रही हैं। उमर ने एसोसिएटिव प्रेस से बात करते हुए कहा था, वह सोमालिया के नागरिक युद्ध से भागे शरणार्थी के रूप में 1995 में 12 साल की उम्र में अमेरिका पहुंची थीं। वह पांच साल बाद 17 साल की उम्र में अमेरिकी नागरिक बनीं।  हिजाब पहनकर शपथ लेने वाली वो पहली अमेरिकी मुस्लिम सांसद बनीं। 

इज़राइल और यहूदी-विरोधी 

अमेरिकी कांग्रेस की महिला सांसद को यहूदी-विरोधी के आरोपों का बार-बार सामना करना पड़ा है। 2012 में, उमर ने ट्वीट किया था, "इजरायल ने दुनिया को सम्मोहित कर लिया है। इसके साथ ही उन्होंने फिलिस्तीन के खिलाफ इजरायल के ऑपरेशन पर निशाना साधा था। उमर ने अमेरिका और इजरायल की तुलना तालिबान और हमास से कर दी थी। जिसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में 25 में से 12 यहूदी सांसद है। यहूदी सांसदों के समूह ने तब कहा था,  इल्‍हान उमर ने जिस तरह से बिना सोचे समझे ये बयान दिया है, उससे आतंकवादियों को संरक्षण मिलेगा। लेकिन उमर ने इसी तरह की टिप्पणियां करना जारी रखा। एक हफ्ते बाद इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर चर्चा करने वाले एक पैनल पर बात करते हुए, उसने कहा, "मैं इस देश में राजनीतिक प्रभाव के बारे में बात करना चाहती हूं जो कहती है कि किसी विदेशी देश के प्रति निष्ठा के लिए जोर देना ठीक है।

9/11 विवाद

मार्च 2019 में काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) में उमर के भाषण को लेकर भी खूब विवाद हुआ था। जब उन्होंने कहा था कि बहुत लंबे समय से हम दूसरे दर्जे के नागरिक होने की परेशानी के साथ जी रहे हैं, और सच कहूं तो मैं इससे थक चुकी हूं, और इस देश के हर मुसलमान को इससे थक जाना चाहिए।  अपने 20 मिनट लंबे भाषण में इल्हान  ने मुसलमान समुदाय के ख़िलाफ़ इस्लामोफ़ोबिया और न्यूज़ीलैंड की मस्जिदों पर हुए हमलों जैसे मुश्किल हालातों पर चर्चा की। सीएआईआर की स्थापना 9/11 के हमलों के बाद हुई थी क्योंकि उन्हें लगा कि कुछ लोगों ने कुछ किया और हम सभी के नागरिक अधिकार ख़त्म होने लगे थे।

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उमर बनाम ट्रम्प

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उमर के सबसे मुखर आलोचक रहे हैं, उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग की और एक से अधिक मौकों पर उन्हें निशाना बनाया। ट्रंप ने चुनावी रैली में एक बार कहा था कि वह हमारे देश से नफरत करती है। वह एक ऐसी जगह से आती हैं, जहां सरकार भी नहीं है, और फिर वह यहां आती हैं और हमें बताती हैं कि हमारे देश को कैसे चलाना है। ट्रंप ने, सदन अध्यक्ष नेस पेलोसी का उल्लेख करते हुए कहा, "यदि आप पेलोसी और इन लोगों के साथ सदन को देखेंगे, तो यह पाएंगे कि वे इस्रायल से नफरत करते हैं और वे उमर में विश्वास करते हैं, जो यहां आई और अपने भाई या किसी से शादी की थी, वह अवैध रूप से आई थी।

अभियान निधि का दुरुपयोग?

उमर को मिनेसोटा में अभियान वित्त उल्लंघन के आरोपों का सामना करना पड़ा है। एक दक्षिणपंथी थिंक थैंक्स  नेशनल लीगल एंड पॉलिसी सेंटर ने 2019 में उमर पर एक राजनीतिक सलाहकार के लिए अभियान के फंड का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और बाद में उमर ने इसी शख्स के साथ शादी भी कर ली। थिंक टैंक ने मिनेसोटा डेमोक्रेट पर राजनीतिक परामर्श फर्म ई स्ट्रीट ग्रुप चलाने वाले टिम माइनेट के लिए व्यक्तिगत यात्रा खर्चों का भुगतान करने के लिए अवैध रूप से अभियान निधि का उपयोग करने का आरोप लगाया। यानी जिस फंड को उमर के अभियान पर काम करने के लिए रखा गया था उसे उन्होंने अपने पति की व्यक्गत यात्रा पर खर्च दिए। द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार अभियान वित्त रिकॉर्ड से पता चला है कि राजनेता ने अगस्त 2018 और सितंबर 2019 के बीच ई स्ट्रीट को $369,000 से अधिक का भुगतान किया। हालांकि, अमेरिकी संघीय चुनाव आयोग ने जनवरी 2022 में शिकायत को खारिज कर दिया।

समानता की आड़ में कट्टरता की पैरवी

इल्हान उमर भले ही खुद को स्वतंत्रता और समानता की सेल्फ डिक्लेयर्ड चैपिंयन बताती हों लेकिन वास्तविकता में कट्टर इस्लाम के प्रति उनका समर्पण साफ दिखता है। बुर्का, हिजाब से लेकर इस्लामोफोबिया की प्रबल समर्थक अमेरिकी सांसद ने तो प्रतिनिधि सभा में वैश्विक स्तर पर इस्लामोफोबिया से लड़ने के लिए विशेष प्रतिनिधि  का पद सृजित करने का प्रस्ताव पेश किया था। भारत में पत्थरबाजों के खिलाफ होने वाली किसी भी कार्रवाई पर इल्हान उमर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जिम्मेदार बता देती हैं। लेकिन उनकी पाक यात्रा से ठीक एक दिन पहले सिखों की पवित्र धार्मिक स्थल ननकाना साहिब में दो युवकों पर जानलेवा जैसी बातों को नजरअंदाज कर जाती हैं। इल्हान उमर कश्मीर, भारतीय मुसलमान, बीजेपी और पीएम मोदी को लेकर भी कई विवादित बयान दे चुकी हैं। हाल ही में अमेरिकी सांसद में उन्होंने कहा था कि आखिर मोदी सरकार मुसलमानों के खिलाफ और क्या-क्या जुल्म करेगी तब जाकर बाइडेन प्रशासन कुछ कहेगा? 

इल्हान उमर हमेशा से ही मुसलमानों की बात करती नजर आती हैं और, इसके लिए वह दूसरे धर्मों की चीजों पर भी टिप्पणी करने से नही चूकती हैं। लेकिन गौर करने वाली बात है कि इल्हान उमर जिस सोमालिया देश से आई हैं। उस देश में एक मजहब (इस्लाम) और एक संस्कृति है। इसके बावजूद सोमालिया में गृहयुद्ध छिड़ गया। इस्लाम को लेकर कहा जाता है कि ये शांति का मजहब है लेकिन बता दें कि सोमालिया में 99 फीसदी से ज्यादा आबादी इस्लाम को ही मानने वाली है। वहीं अमेरिका में बतौर शरणार्थी से सांसद तक का सफर तय करने वाली इल्हान उमर अमेरिका के समाज औऱ वहां की राजनीति को भी कट्टर इस्लाम के रंग में रंगने की कोशिश में लगीं हैं। 

-अभिनय आकाश 

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