UGC एक्ट विवाद में कूदे Kumar Vishwas! 'सवर्ण' वाली कविता शेयर कर सरकार को घेरा, नियमों पर मचा बवाल

By रेनू तिवारी | Jan 27, 2026

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के संशोधित नियमों को लेकर देश भर में राजनीतिक और सामाजिक पारा चढ़ गया है। उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए इन नए नियमों ने अब 'सवर्ण बनाम अन्य' का रूप ले लिया है। इस विवाद में अब प्रख्यात कवि कुमार विश्वास भी शामिल हो गए हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर एक तल्ख कविता के जरिए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस बढ़ते असंतोष के बीच, जाने-माने कवि कुमार विश्वास भी UGC के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। X पर उन्होंने दिवंगत रमेश रंजन की एक कविता पोस्ट की और नए नियमों की निंदा की। कुमार ने लिखा, "चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा 'सवर्ण' हूँ मेरा, रोंया रोंया उखाड़ लो राजा।" उन्होंने #UGC_RollBack हैशटैग का भी इस्तेमाल किया, जो चल रहे आंदोलन के प्रति उनके समर्थन का संकेत है।

इसे भी पढ़ें: Women Health: सिर्फ पीरियड बंद होना नहीं, Womens Health से जुड़े ये हैं मेनोपॉज के असली Symptoms

अब SC, ST और OBC समुदायों के छात्र इस समिति के सामने जातिगत भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पहले, केवल SC और ST छात्र ही ऐसी शिकायतें दर्ज कराने के योग्य थे, लेकिन अब OBC छात्रों को भी शामिल कर लिया गया है। नियमों में समिति में SC, ST और OBC श्रेणियों से अनिवार्य प्रतिनिधित्व का प्रावधान है, लेकिन सवर्ण जाति का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है। यह बहिष्कार विवाद का एक बड़ा कारण बन गया है।

इसे भी पढ़ें: Alankar Agnihotri के इस्तीफे ने Uttar Pradesh की राजनीति में मचाई हलचल? UGC Regulations के मुद्दे पर फँस गई Modi-Yogi सरकार!

सवर्ण जातियों के समूहों के बीच दूसरी बड़ी चिंता झूठी शिकायतों के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान को हटाना है। पिछले नियमों में निराधार आरोप लगाने पर दंड का प्रावधान था। नई गाइडलाइंस में ऐसे किसी प्रावधान का उल्लेख नहीं है, जिसका विरोध करने वालों का तर्क है कि यह परोक्ष रूप से यह मानता है कि केवल सवर्ण छात्र ही अपराधी हो सकते हैं जबकि अन्य हमेशा पीड़ित होते हैं।

प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?

UGC एक्ट का विरोध करने वालों का तर्क है कि किसी भी तरह के भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, चाहे पीड़ित या आरोपी किसी भी जाति का हो। वे मांग करते हैं कि सवर्ण छात्रों को भी "सुदामा कोटा" या "भिखारी" जैसे अपमानजनक टिप्पणियों से बचाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी जोर देते हैं कि झूठी शिकायत दर्ज कराने पर कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जैसा कि पहले होता था। विपक्षी पार्टियां भी मैदान में आ गई हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने कहा कि अगर सरकार भेदभाव वाले कानून लाती है, तो उसे संसद के अंदर और सड़कों पर दोनों जगह विरोध का सामना करना पड़ेगा।

प्रमुख खबरें

इलेक्ट्रिक एवं हाइड्रोजन बसों से जेवर एयरपोर्ट की राह हुई और आसान, विधायक धीरेन्द्र सिंह

France ने सौंपा राफेल का राज, चीन-पाकिस्तान में मचा हड़कंप

मंदिर पर हमला करने वाले को पहली बार फांसी, पूरा भारत चौंका!

INDIA बैठक में Rahul Gandhi का दम! बोले- अगर एकजुट हुए तो BJP को हराना आसान है