By रेनू तिवारी | Nov 02, 2026
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को एक और बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के भीतर गहराते असंतोष के बीच एक और वरिष्ठ विधायक ने पार्टी और अपनी विधानसभा सदस्यता को अलविदा कह दिया है। अमृतसर उत्तर (Amritsar North) से AAP विधायक और पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। गौरतलब है कि पिछले महज 48 घंटों (2 दिनों) के भीतर AAP से इस्तीफा देने वाले वे तीसरे विधायक बन गए हैं। उनसे ठीक पहले समाना से विधायक चेतन सिंह जौरामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा भी पार्टी छोड़ चुके हैं। यह राजनीतिक उथल-पुथल तब देखने को मिल रही है जब आम आदमी पार्टी ने हाल ही में 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए अपने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है।
अमृतसर के विधायक का दावा: 90% लक्ष्य पूरे किए
अपनी पोस्ट में, विधायक ने कहा कि उन्होंने अपने विधायी लक्ष्यों का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है और पंजाब को व्यवस्थागत संकटों से बाहर निकालने के लिए एकजुट प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "आपके सहयोग और ईश्वर के आशीर्वाद से, हमें 'गली-मोहल्ले की राजनीति' और 'फीता काटने' (उद्घाटन करने) की राजनीति से ऊपर उठना होगा। हमें एकजुट होकर पंजाब को नशीले पदार्थों, जबरन वसूली, गैंगस्टरों और भ्रष्टाचार के चंगुल से निकालकर, फिर से एक प्रगतिशील और खुशहाल राज्य बनाना होगा... जैसा कि आप सभी जानते हैं, एक विधायक के तौर पर मैंने अपने 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरे किए हैं—यानी वे सभी काम किए हैं, जो एक विधायक को करने चाहिए।"
विधायक ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में सामंती 'माई-बाप' (अहंकारी/संरक्षक-आश्रित) वाली राजनीति को खत्म किया। उन्होंने हमेशा अमृतसर के लोगों की आवाज उठाई और पानी-सीवेज की समस्याओं से लेकर सर्किट हाउस, कंपनी बाग, गंदे नालों, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, सरकारी मेडिकल कॉलेज, स्वरूप रानी कॉलेज और बरगारी बेअदबी मामले जैसे मुद्दों को पूरी बेबाकी से उठाया। विधायकों ने नशीले पदार्थों की समस्या को लेकर सरकार की आलोचना की
इससे पहले, पंजाब के पटियाला जिले में समाना से चेतन सिंह जौरामाजरा और सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा - जो दोनों आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक हैं - ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा, जबकि पूर्व मंत्री जौरामाजरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की घोषणा की।
पहली बार विधायक बने इन दोनों नेताओं ने नशीले पदार्थों की समस्या, भारी कर्ज और अकाल तख्त के निर्देशों के बावजूद 'धार्मिक अपमान विरोधी कानून' (anti-sacrilege law) में संशोधन न करने जैसे कई मुद्दों को लेकर AAP सरकार पर तीखा हमला बोला। जौरामाजरा 8 जनवरी 2023 से 23 सितंबर 2024 तक मंत्री रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया था।