By एकता | Apr 30, 2026
हर साल की तरह इस बार भी 1 मई को 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस' मनाया जाएगा, लेकिन 2026 का यह दिन हर साल से कुछ अलग होने वाला है। आज जब पूरे भारत में मजदूर अपने बेहतर वेतन और अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरकर आवाज उठा रहे हैं, तो यह दिन सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि एक बड़ी जरूरत बन गया है। इस साल का मुख्य मकसद केवल जश्न मनाना नहीं, बल्कि एक ऐसा माहौल तैयार करना है जहां मजदूर को न केवल सही दाम मिले, बल्कि उसे मानसिक शांति और सुरक्षा का अहसास भी हो।
मजदूरों के इस हक की लड़ाई 1886 में शिकागो की गलियों से शुरू हुई थी, जहां '8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे खुद के लिए' नारा गूंजा था। भारत में इसकी चिंगारी 1923 में चेन्नई के समुद्र तट से सुलगी थी। आज 2026 में भी, चाहे वह बैंक की छुट्टी हो या बड़ी रैलियां, 1 मई हमें याद दिलाता है कि दुनिया की हर ऊंची इमारत और हर बड़ी कामयाबी के पीछे किसी न किसी मेहनतकश का पसीना शामिल है।