Prabhasakshi NewsRoom: Lahore की पुरानी पहचान वापस लौटेगी, सड़कों के हिंदू और जैन नाम बहाल किये जाएंगे

By नीरज कुमार दुबे | May 19, 2026

पाकिस्तान के लाहौर में अब विभाजन से पहले की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत को फिर से जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने शहर की कई पुरानी सड़कों, गलियों और इलाकों के मूल नाम बहाल करने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य लाहौर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करना है, जो विभाजन के बाद धीरे धीरे बदलती चली गई थी।

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हम आपको बता दें कि लाहौर की प्रमुख सड़कों में क्वीन्स रोड़ का नाम बदलकर फातिमा जिन्ना रोड़, जेल रोड़ का नाम अल्लामा इकबाल रोड़, डेविस रोड़ का नाम सर आगा खान रोड़ और लॉरेंस रोड़ का नाम बाग ए जिन्ना रोड़ कर दिया गया था। इसी तरह एम्प्रेस रोड़ को शाहरा ए अब्दुल हमीद बिन बादीस नाम दिया गया था। कई पुराने मोहल्लों के नाम भी बदले गए थे। कृष्ण नगर को इस्लामपुरा, संतनगर को सुन्नत नगर और धर्मपुरा को मुस्तफाबाद कहा जाने लगा। ब्रैंडरेथ रोड का नाम निश्तर रोड़ और टेंपल स्ट्रीट का नाम हमीद निजामी रोड़ रखा गया था।

इसी क्रम में लक्ष्मी चौक का नाम मौलाना जफर अली खान चौक, जैन मंदिर रोड़ का नाम बाबरी मस्जिद चौक और राम गली का नाम रहमान गली कर दिया गया था। कुम्हारपुरा को गाजियाबाद तथा आउटफॉल रोड को जिलानी रोड़ के नाम से जाना जाने लगा था। अब इन पुराने नामों को वापस लाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।

पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह पहल लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल प्रोजेक्ट के तहत की जा रही है। इस परियोजना का नेतृत्व पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं। उनकी ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव को पिछले सप्ताह मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई। अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद लाहौर की उस बहुसांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है जो विभाजन से पहले शहर की पहचान हुआ करती थी।

इस पहल के साथ नवाज शरीफ ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मिंटो पार्क, जिसे अब ग्रेटर इकबाल पार्क कहा जाता है, में तीन ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों और एक पारंपरिक अखाड़े को फिर से बहाल करने की सिफारिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अतीत में हुई आलोचनाओं के बाद छवि सुधारने का प्रयास भी माना जा रहा है।

दरअसल, वर्ष 2015 में जब शहबाज शरीफ पंजाब के मुख्यमंत्री थे, तब शहरी विकास योजना के तहत मिंटो पार्क के तीन ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान, क्लब क्षेत्र और एक प्रसिद्ध कुश्ती अखाड़ा ध्वस्त कर दिया गया था। उस समय इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी। खेल जगत और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े लोगों ने इसे शहर की ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया था।

हम आपको बता दें कि मिंटो पार्क के क्रिकेट मैदानों का इतिहास भी बेहद समृद्ध रहा है। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान इंजमाम उल हक सहित कई प्रसिद्ध क्रिकेटरों ने यहां स्थित क्लबों में प्रशिक्षण लिया था। विभाजन से पहले भारत के महान क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी यहां अभ्यास किया करते थे। वर्ष 1978 में जब लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट टीम के साथ लाहौर आए थे, तब उन्होंने क्रिसेंट क्रिकेट क्लब के खिलाड़ियों के साथ समय बिताया था। यह वही क्लब था जिसके लिए वह विभाजन से पहले खेल चुके थे।

मिंटो पार्क का कुश्ती अखाड़ा भी कभी उपमहाद्वीप की खेल संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। यहां महान पहलवान गामा पहलवान, गूंगा पहलवान और इमाम बख्श जैसे दिग्गजों ने मुकाबले लड़े थे। विभाजन से पहले इसी मिंटो पार्क में हिंदू समुदाय दशहरा उत्सव भी मनाया करता था, जिससे इस क्षेत्र की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक परंपरा झलकती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि लाहौर में पुराने नामों और ऐतिहासिक स्थलों को पुनर्जीवित करने की यह पहल केवल अतीत को याद करने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह उस साझा सांस्कृतिक इतिहास को स्वीकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है जिसने कभी इस शहर को विविधता और सहअस्तित्व की मिसाल बनाया था।

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