Gyan Ganga: लक्ष्मणजी ने सुग्रीव के पलंग पर बैठकर इस तरह उड़ा दी थी उसकी नींद

By सुखी भारती | Jul 22, 2021

अनेकों दिव्य व रसपूर्ण प्रसंगों का पीछा करते हुए हमने अपने मन को, आनंद सागर की गहराइयों में गहरी से गहरी डुबकियां लगवाई हैं। प्रभु की प्रत्येक लीला में, प्रत्येक बार कुछ ऐसा दिव्य मिला कि हमें जीवन जीने का कोई नया ही सूत्र हाथ लगा। कारण कि प्रभु के जीवन चरित्र की नन्हीं-सी-नन्हीं कड़ी में भी, महान से महान संदेश सिमटे होते हैं। रामायण कोई मनोरंजन के लिए लिखी गई कोई सांसारिक प्रेम गाथा नहीं है। अपितु त्याग, तपस्या व आध्यात्म की मीठी चाश्नी का सुंदर मिश्रण है। अब विगत अंक की कड़ी को ही ले लीजिए। श्री लक्ष्मण जी को श्रीहनुमान जी भीतर ले जाकर सुग्रीव के पलंग पर जाकर विराजित कर देते हैं। सांसारिक दृष्टि से हमें यह सामान्य-सी क्रिया भासित होती है। लेकिन इस नन्हीं-सी क्रिया में भी गजब का आध्यात्मिक संदेश करवटें ले रहा है। संदेश यह कि श्री लक्ष्मण जी सुग्रीव को जगाने आये हैं। बाहरी दृष्टि से देखें तो सुग्रीव सोया थोड़ी न है। अपितु वह तो रात−रात भर जाग−जाग कर अपने विषय भोगों की तृप्ति करने में मस्त है। बारिशों के दिनों में जैसे चीटियां अपने अंडों व भोजन को संरक्षित कर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने में दिन रात संलग्न रहती हैं, मानो सुग्रीव भी विषय भोग विलासों में ऐसी ही मेहनत कर रहा था। उसे लग रहा था कि जीवन तो बहुत छोटा पड़ रहा है। क्योंकि विषय भोगने की सुची में अनंत विषय हैं और जीवन में प्रौढ़ अवस्था आने में भी अधिक समय शेष दिखाई नहीं पड़ रहा। तो इतने कम समय में मैं कैसे सब रस भोगों का सुख प्राप्त कर पाऊँगा। सुग्रीव को तनिक भी चिंता नहीं कि मृत्यु को विलाप व रुदन की घड़ी न बनाकर, अगर उत्सव में परिवर्तित करना है, तो जीवन रहते−रहते आध्यात्मिक जगत के दिव्य रहस्यों से अवगत होना होगा। ऐसा नहीं कि इसके लिए उसे अपने परिवार व संसार का त्याग करना होगा। अपितु अपने सांसारिक कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए ही प्रभु में विलीन होना होता है।

इसे भी पढ़ें: Gyan Ganga: लक्ष्मणजी का क्रोध देखकर सुग्रीव ने अपनी पत्नी को याचना के लिए क्यों भेजा ?

श्री हनुमान जी ने सुग्रीव के संदर्भ में इसी सिद्धांत का तो प्रतिपादन किया। वे सुग्रीव के पलंग पर साक्षात शेषनाग के अवतार श्रीलक्ष्मण जी को विराजमान कर देते हैं। कोई साधरण नाग का दंश तो हो सकता है कि इतना प्रभावी न हो। लेकिन शेषनाग के मृत्यु कारक दंश पर कैसे संदेह किया जा सकता था। श्रीहनुमान जी को पता है कि हमारे राजा सुग्रीव महाराज तो भय के पुजारी हैं ही। और श्रीलक्ष्मण जी को सुग्रीव के पलंग पर बिठाने का सीधा-सा तात्पर्य है कि जब−जब सुग्रीव का मन पलंग पर सोने का करेगा, और तब−तब सुग्रीव जब श्रीलक्ष्मण जी को पलंग पर बैठा देखेगा, तो सुग्रीव की निद्रा स्वतः ही नौ दो ग्यारह हो जाया करेगी। सुग्रीव जगा रहेगा तो अपने आप वह विषयों से रहित रहेगा। सज्जनों निश्चित ही यह घटना छोटी-सी प्रतीत हो। लेकिन एक सांसारिक जीव के लिए सफल व श्रेष्ठ आध्यात्मिक जीवन जीने के लिए यह घटना निःसंदेह अति उत्तम है। जिसमें हमें यह प्रेरणा मिलती है कि भक्तिपथ पर चलते हमको अनेकों ही विषयों से दो−दो हाथ करना पड़ता है। ऐसी स्थिति आती है कि हमें भक्तिपथ से गिर ही जाना होता है। ऐसे में हमें क्या करना चाहिए। निःसंदेह ही हमें सुग्रीव के जीवन में घटी इस सुंदर घटना को अपने चरित्र में चरित्रार्थ करना चाहिए। पहला तो किसी भी स्थिति में संत का आश्रय नहीं छोड़ना चाहिए। और दूसरा वैराग्य को अपने जीवन में सदा रखना चाहिए, भले ही हम सोने के लिए अपने पलंग पर क्यों न जा रहे हों। तब भी संत और वैराग्य हमारे जीवन के अभिन्न अंग होने चाहिए। यह सब कर लिया तो हमारा भक्तिपथ निश्चित ही ठोस व अडिग रहेगा, इसमें किंचित भी संदेह नहीं।

अब सुग्रीव श्रीलक्ष्मण जी के समक्ष उपस्थित होता है अथवा नहीं, जानेंगे अगले अंक में...क्रमशः

-सुखी भारती

प्रमुख खबरें

Monsoon Destinations in India: पार्टनर संग एक Perfect Weekend के लिए शानदार हैं ये 5 रोमांटिक डेस्टिनेशंस

India A टीम में मजबूरी में बड़ा बदलाव, चोटिल Yudhveer की जगह IPL स्टार Ashok Sharma शामिल

ऑपरेशन टाइगर अंतिम चरण में, Monsoon Session से पहले शिंदे को मिलेंगे 7 UBT MP!

Hyderabad में Donald Trump Avenue: US-India संबंधों में नई मिसाल, 23 जून को उद्घाटन