बेचारी कांग्रेस ! गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष ना खोज पाने की मजबूरी को सहे जा रही है

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 29, 2020

कांग्रेस में सामूहिक नेतृत्व और पूर्णकालिक एवं सक्रिय अध्यक्ष की मांग को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा तो उस पर हंगामा हो गया। गांधी परिवार को पहली बार पार्टी के भीतर से चुनौती मिली तो वह हिल गया और बगावती रुख अपनाने वाले नेताओं को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सबके सामने भाजपा का एजेंट बता दिया गया। जब पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल कई ने कहा है कि उन्हें विरोधी नहीं समझा जाए और उन्होंने कभी भी पार्टी नेतृत्व को चुनौती नहीं दी तब जाकर हंगामा कुछ कम हुआ लेकिन जो चिंगारी लग गयी है वह बुझी नहीं है। जिस तरह पत्र लिखने वाले नेता ट्वीटों के माध्यम से या फिर अपने मीडिया साक्षात्कारों के माध्यम से अपना दर्द दिखा रहे हैं वह दर्शाता है कि कांग्रेस में भीतर ही भीतर गांधी परिवार के खिलाफ बगावत पनप रही है।

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पार्टी का जो सांगठिनक ढांचा इस समय है उसमें अंतरिम अध्यक्ष के हाथ में पिछले एक साल से कांग्रेस की कमान है। महासचिव के पदों पर वह लोग जमे हुए हैं जोकि पिछले 20-30 सालों से इन पदों पर डेरा डाले हुए हैं। ऐसे में युवाओं को आगे बढ़ायेगा कौन? हाल के दिनों में कांग्रेस के युवा नेताओं ने जिस तरह पार्टी से नाराजगी जताई है उसके चलते राजनीति में आने के इच्छुक युवा नेता कांग्रेस का चयन नहीं कर रहे हैं। प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह कांग्रेस से जुड़े सभी विषयों पर गहन मंथन किया गया है इसलिए समय निकाल कर इसे अवश्य देखें।

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