Operation Sheruwali के दौरान शहीद हुए Lieutenant Beereshwar Goswami, पदोन्नति से दो दिन पहले सैन्य अधिकारी के निधन से देश दुखी

By नीरज कुमार दुबे | Jun 08, 2026

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान भारतीय सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में आतंकवादियों की तलाश के बीच हुए इस हादसे ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। सेना, प्रशासन, राजनीतिक नेतृत्व और आम नागरिकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी शहादत को राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण बताया है।

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शनिवार शाम अभियान के दौरान लेफ्टिनेंट गोस्वामी अपनी टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। वह एक संकरी और खतरनाक पहाड़ी धार से गुजर रहे थे, तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरी खाई में गिर गए। साथ मौजूद जवानों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और उन्हें बाहर निकाला, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। जिस क्षेत्र में यह अभियान चल रहा है, वहां ऊंची चट्टानें, घने जंगल, खराब मौसम और फिसलन भरी ढलानें लगातार सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पी.के. मिश्रा और सभी अधिकारियों तथा जवानों ने लेफ्टिनेंट गोस्वामी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण हमेशा सैनिकों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। सेना ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में परिचालन ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।

रविवार को जम्मू वायुसेना स्टेशन पर पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा और पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात सहित सेना, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर दिवंगत अधिकारी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित उनके पैतृक गांव पांडे खोला भेजा गया।

अल्मोड़ा में भी शहीद अधिकारी को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना के हेलीकाप्टर से उनका पार्थिव शरीर अल्मोड़ा पहुंचा, जहां प्रशासनिक अधिकारियों, सेना के जवानों, जनप्रतिनिधियों और सैकड़ों ग्रामीणों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। विश्वनाथ घाट पर सैन्य परंपराओं के अनुसार शस्त्र झुकाकर और गार्ड ऑफ आनर देकर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पूरा क्षेत्र गमगीन माहौल में डूबा रहा।

हम आपको बता दें कि लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी केवल पच्चीस वर्ष के थे। कम उम्र में ही उन्होंने सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा का सपना पूरा किया था। उनके पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी प्रशासनिक अधिकारी हैं, जबकि माता सरस्वती देवी शिक्षिका हैं। उनके बड़े भाई भी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। इस तरह की भी रिपोर्टें हैं कि पदोन्नति से दो दिन पहले ही उनका निधन हुआ है।

जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने कहा कि इतनी कम उम्र में राष्ट्र रक्षा के लिए दिया गया उनका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा और युवा पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। वहीं जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक नेताओं ने उनकी शहादत को राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बताया।

हम आपको बता दें कि राजौरी के दुर्गम जंगलों में आतंकवादियों के खिलाफ जारी अभियान अभी भी चल रहा है। सुरक्षा बल इलाके में घेराबंदी, तलाशी अभियान, घात और आधुनिक तकनीकों की सहायता से आतंकियों की तलाश में जुटे हुए हैं। लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी की शहादत ने इस अभियान को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, लेकिन साथ ही यह देश के उन जवानों के अदम्य साहस की भी याद दिलाती है, जो हर परिस्थिति में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देते हैं।

ऑपरेशन शेरुवाली से संबंधित ताजा अपडेट यह भी है कि राजौरी और पुंछ के पहाड़ी इलाकों में आतंक के खिलाफ चल रही सबसे लंबी और कठिन घेराबंदी अब निर्णायक मोड़ में पहुंचती दिख रही है। घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और नियंत्रण रेखा से सटे संवेदनशील इलाके इस समय सुरक्षा बलों की चौतरफा निगरानी में हैं। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम लगातार संदिग्ध आतंकियों की तलाश में जंगल दर जंगल छानबीन कर रही है। सुरक्षा बलों ने आधुनिक निगरानी तंत्र और लगातार दबाव बनाकर आतंकियों की हर हरकत पर नजर जमा रखी है। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां इलाके में आतंकियों की आवाजाही को रोकने के लिए हर उपलब्ध संसाधन का इस्तेमाल कर रही हैं। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत कर दिया गया है कि बिना जांच किसी को भी संवेदनशील इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।

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