By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 13, 2026
लोकसभा की कार्यवाही बृहस्पतिवार को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दी गई। मानसून सत्र के आखिरी दिन सदन की कार्यवाही 11 बजे आरंभ होने पर लोकसभा अध्यक्ष ने आसन पर बैठते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने के लिए कहा। हालांकि, सामान्यत: सत्र समाप्ति के मौके पर वंदे मातरम् से पहले वह उस सत्र की कार्य उत्पादकता तथा उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं।
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण दोनों सदनों में लगातार गतिरोध बना रहा। सरकार ने कहा था कि वह छात्रों के विषय पर चर्चा कराने और इस पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए तैयार है, हालांकि विपक्ष का कहना था कि राम मंदिर से कथित चढ़ावा चोरी पर चर्चा, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर शाह के जवाब और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से माफी की मांग करने के मुद्दे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा वह इन तीनों मांगों पर कायम है। सत्र के आखिरी दिन तक यह गतिरोध नहीं टूट सका।
सदन ने 29 जुलाई को परीक्षा में सुधार से संबंधित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी। नीट प्रश्नपत्र लीक की पृष्ठभूमि में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में सख्त प्रावधान शामिल करने के लिए लाए गए इस संशोधन विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा हुई जिसमें नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, पार्टी नेता गौरव गोगोई, भाजपा के तेजस्वी सूर्या, बांसुरी स्वराज, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने भाग लिया।
सदन ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ ही उसी सम्मान के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को अनिवार्य बनाने वाले ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी द्रमुक समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी। इनके अलावा अन्य कुछ विधेयक विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच चर्चा के बिना पारित किए गए। जिनमें ‘विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक, 2026’, ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026’, ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’, ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026’, ‘बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026’ और ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ शामिल हैं।
सदन में कई विपक्षी दलों की आलोचना और विभिन्न परमार्थ संगठनों की मांग के बाद बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 को विस्तृत समीक्षा और संभावित सुझावों के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया। इस पूरे सत्र के दौरान एक बार भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सके।