By अनुराग गुप्ता | Aug 09, 2021
नयी दिल्ली। सालों की कड़ी मेहनत और चार साल के इंतजार के बाद एक खिलाड़ी को ओलंपिक में प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। ऐसे में खिलाड़ी पदक जीतेगा या नहीं । यह उसके प्रशिक्षण और मानसिकता पर निर्भर करता है। हाल ही में भारतीय खिलाड़ियों का ओलंपिक का सफर समाप्त हो गया है लेकिन खिलाड़ियों के मन में पेरिस में होने वाले ओलंपिक की चिंताएं जरूर शुरू हो गई होंगी।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्कूल के दिनों में पिंकी करमाकर यूनिसेफ़ की स्पोर्ट्स फ़ॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाती थी। इसके अलावा उन्होंने अशिक्षित महिलाओं को शिक्षित करने का संकल्प भी लिया था। उन्होंने 40 महिलाओं को हर शाम शिक्षा दी है। लेकिन मौजूद समय में अपने परिवार में कमाने वाली इकलौती शख्त हैं।