एयरपोर्ट के विस्थापित किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री शुरू

By प्रेस विज्ञप्ति | Aug 14, 2026

जेवर, 14 अगस्त 2026। नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण के लिए अपनी भूमि देने वाले तथा परियोजना के कारण विस्थापित हुए किसानों की वर्षों से लंबित एक महत्वपूर्ण मांग का आज समाधान प्रारंभ हो गया। पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना के अंतर्गत जेवर बांगर में विस्थापित परिवारों को आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया आज से शुरू कर दी गई।

1. उमर मोहम्मद पुत्र हाशियार खान — ग्राम नगला शरीफ खां

2. हंसराज पुत्र चतर सिंह — ग्राम दयानतपुर खेड़ा

3. ओमप्रकाश पुत्र पन्नालाल — ग्राम दयानतपुर खेड़ा

4. जयवीर सिंह पुत्र नाहर सिंह — ग्राम रोही

5. प्रेमवती पत्नी प्रेम — ग्राम रोही

शामिल हैं।

वर्ष 2020-21 में विस्थापित परिवारों के लिए कुल 3065 भूखंडों के आरक्षण/आवंटन पत्र जारी किए गए थे। किसान लंबे समय से इन भूखंडों की रजिस्ट्री कराकर विधिवत मालिकाना हक दिए जाने की मांग कर रहे थे। वर्ष 2022 से यह मामला लंबित होने के कारण आवंटन के बावजूद किसानों को अपने भूखंडों का पूर्ण मालिकाना अधिकार प्राप्त नहीं हो पा रहा था।

आज पांच किसानों की रजिस्ट्री के साथ इस लंबे समय से प्रतीक्षित प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। अब शेष प्रभावित एवं पात्र किसानों की रजिस्ट्री भी क्रमबद्ध तरीके से कराई जाएगी।

इस अवसर पर जेवर विधायक श्री धीरेन्द्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा- “जेवर के किसानों ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन देकर उत्तर प्रदेश और देश के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। विस्थापन के पश्चात उन्हें आवंटित भूखंडों का मालिकाना हक मिलना उनका अधिकार था। वर्ष 2022 से लंबित इस समस्या का आज समाधान प्रारंभ हुआ है। आज मैंने स्वयं सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, जेवर में उपस्थित रहकर पांच विस्थापित किसानों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को प्रारंभ कराया है। अब शेष सभी पात्र किसानों की रजिस्ट्री भी क्रमबद्ध रूप से कराई जाएगी।”

धीरेन्द्र सिंह ने आगे कहा- “मैं माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने सदैव जेवर के किसानों के हितों और उनकी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी है। एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले किसान केवल भूमि दाता नहीं हैं, बल्कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा के वास्तविक भागीदार हैं। उनके अधिकार, सम्मान और पुनर्वास की जिम्मेदारी हमारी है।”

जेवर विधायक ने संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अब अभियान के रूप में तेजी से आगे बढ़ाया जाए और शेष सभी प्रभावित किसानों की रजिस्ट्री अतिशीघ्र पूर्ण कराई जाए, जिससे किसी भी किसान को अपने आवंटित भूखंड के मालिकाना हक के लिए और प्रतीक्षा न करनी पड़े। आज की शुरुआत के साथ वर्षों से अपने आवंटित भूखंडों के मालिकाना हक की प्रतीक्षा कर रहे विस्थापित किसानों की एक बड़ी समस्या के स्थायी समाधान का रास्ता साफ हो गया है।

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