चीन को चुनौती देती सबसे लंबी रेल टनल, भारत के इन कदमों ने बढ़ा दी ड्रैगन की बेचैनी

By अभिनय आकाश | Dec 27, 2022

सरहद पर चीन की किसी भी हिमाकत से निपटने के लिए भारत बिल्कुल तैयार है। भारत के इंफ्रास्ट्रचर बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि देखने को मिलेगी। भारत ने पूर्वोत्तर में तीन रणनीतिक रेलवे लाइनों का अंतिम सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, जिसका उद्देश्य सेना को अपने लोगों और उपकरणों को सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच मजबूती हासिल करना है। ये रणनीतिक रेलवे लाइनें, जो अगले एक दशक में पूरी होंगी, पहले से बन रहे राजमार्गों के व्यापक नेटवर्क में शामिल होंगी।

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भारत के इन कदमों ने बढ़ा दी चीन की बेचैनी

ऋषिकेश कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज पर 126 किमी लंबी रेल लाइ परियोजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग लाइन नौ पैकेजों में विभाजित है। ये परियोजना पूरी होने की तिथि 31 दिसंबर 2024 है। 36 हजार करोड़ ऋषिकेेश कर्णप्रयाग ब्राडगेज रेल परियोजना करीब 16.216 करोड़ की लागत से बन रही है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा का समय 7 घंटे से घटकर सिर्फ 2 घंटे हो जाएगा। 

गरतांग गली की लगभग 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना हैं। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी के सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था। अब करीब 59 सालों बाद दोबारा खोला गया।

वायुसेना को डिफेंस रडार लगाने के लिए चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी में जमीन दी जा रही है। एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड बन रहे हैं। के-9 वज्र हॉवित्जर तैनात हो रही हैं।

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