By दिव्यांशी भदौरिया | Sep 15, 2026
हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला के जनक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र और भव्य महलों का निर्माण किया था। हर साल यह पर्व कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 कब है? (Vishwakarma Puja 2026 Date)
हर साल कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा की जाती है। इसका मतलब, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेगा, तो उसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। इस बार सूर्य कन्या राशि में 17 सितंबर को प्रवेश करने जा रहे हैं। इसी दिन विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी।
विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त
- सामान्य मुहूर्त: चल चौघड़िया 10 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 16 मिनट तक।
-उत्तम मुहूर्त: लाभ चौघड़िया दोपहर में 12 बजकर 16 मिनट से 1 बजकर 48 मिनट तक।
- उत्तम मुहूर्त: अमृत चौघड़िया दोपहर में 1 बजकर 48 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक।
बता दें कि, भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए दोपहर का समय सबसे बेस्ट है।
विश्वकर्मा पूजा विधि
- सबसे जरुरी है पूजा स्थल को अच्छे से साफ करना। फिर भगवान विश्वकर्मा का प्रतिमा स्थापित करें।
- अब आप कलश की स्थापना करें और हाथ में थोड़ा अक्षत और जल लेकर पूजा का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान विश्वकर्मा को जल, अक्षत, रोली, फूल और मिठाई अर्पित करें।
- फिर कार्यस्थल पर काम आने वाली मशीनों और वाहन आदि की पूजा करें।
- आखिर में भगवान विश्वकर्मा का कथा का पाठ करें और उनकी आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
- इसके बाद प्रसाद वितरित करने के बाद खुद भी प्रसाद ग्रहण करें।