Khushwant Singh Death Anniversary: दिल्ली, लेखन और महिलाओं से था इश्क, जानिए 'Legend' की अनसुनी बातें

By अनन्या मिश्रा | Mar 20, 2026

आज ही के दिन यानी की 20 मार्च को खुशवंत सिंह का निधन हो गया था। उनका विवादों से नाता कभी छूटा नहीं। वह हमेशा अपनी शर्तों पर जिंदगी जीते हैं। खुशवंत सिंह अपने गंभीर लेखन और हाजिर जवाबी के लिए मशहूर थे। हालांकि उनको कम ही लोग लेखक मानते हैं। लेकिन खुशवंत सिंह ने कभी इसकी परवाह नहीं की। खुशवंत सिंह ने अपनी आखिरी सांस तक लिखना नहीं छोड़ा। वह 99 साल की उम्र तक सुबह 4 बजे उठकर लिखना पसंद करते थे। वह खुद को दिल्ली का सबसे बड़ा यारबाज और दिलफेंक बूढ़ा आशिक मानते थे। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर खुशवंत सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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रचनाएं

'ट्रेन टू पाकिस्तान' और 'कंपनी ऑफ वूमन' जैसी बेस्टसेलर किताबें देने वाले खुशवंत सिंह ने 80 किताबें लिखी थीं। उन्होंने अपने कॉलम और किताबों में संता-बंता के कैरेक्टर से लोगों को गुदगुदाया था। आज भी खुशवंत सिंह को ऐसे शख्स के रूप में पहचाना जाता है, तो लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते थे।

तीन चीजों से था प्यार

खुशवंत सिंह तीन चीजों से प्यार करते थे। जिसमें पहला दिल्ली से लगाव, दूसरा प्यार लेखन औऱ तीसरा खूबसूरत महिलाएं थीं। उन्होंने अपनी जिंदगी की आखिरी सांस तक लिखना नहीं छोड़ा था। वह 99 साल की उम्र तक सुबह 4 बजे उठकर लिखना पसंद करते थे। खुशवंत सिंह की गिनती पीएम इंदिरा गांधी की करीबियों में की जाती थी। लेकिन अगर वह विरोध करने पर आ जाएं, तो इंदिरा गांधी का भी विरोध करने से नहीं चूकते थे।

राजनीतिक सफर

खुशवंत सिंह के चाचा सरदार उज्जवल सिंह तमिलनाडु औऱ पंजाब के राज्यपाल रहे। राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े रहने की वजह से वह भी राजनीति में उतरे। वहीं साल 1980 से लेकर 1986 तक खुशवंत सिंह राज्यसभा के सदस्य रहे। साल 2007 में खुशवंत सिंह को 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

मृत्यु

वहीं दिल्ली में 20 मार्च 2014 को 99 साल की उम्र में खुशवंत सिंह का निधन हो गया था।

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