By अनन्या मिश्रा | Sep 22, 2026
शरीर को हेल्दी और फिट रखने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट लोगों को अपनी डाइट में सुधार करने के लिए बोलते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक हमारी डाइट में उन चीजों की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए, जिनसे हमारे शरीर को अधिकतर पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। खाने में फाइबर, विटामिन्स और प्रोटीन वाली चीजों को शामिल करना चाहिए। इससे न सिर्फ वजन में सुधार होता है, बल्कि शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है।
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इसको लेकर हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि लो कार्ब्स वाली डाइट लेने से कुछ लोगों में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल तेजी से बढ़ सकता है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट बैड कोलेस्ट्रॉल को पहले ही धमनियों की दीवारों में फैट जमा करके नसों को संकरा करने और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाने वाला बता चुके हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या लो कार्ब डाइट नहीं लेना चाहिए और इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट का क्या मानना है।
लो कार्बोहाइड्रेट एक ऐसी डाइट है, जिसमें आलू, रोटी और ब्रेड जैसी चीजें कम खाई जाती हैं, जोकि आजकल काफी ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं। इस डाइट को ब्लड शुगर कंट्रोल करने, वेट लॉस और डायबिटीज आदि से बचने के लिए लिया जाता है।
लेकिन एक नई रिसर्च ने इस डाइट को लेकर लोगों में चिंता बढ़ा दी है। एक अध्ययन में पाया गया कि कुछ लोगों द्वारा लो कार्ब वाली डाइट लेने से उनका कोलेस्ट्रॉल का लेवल काफी बढ़ सकता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल संबंधी बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल धमनियों को संकरा करता है और स्ट्रोक व हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाता है। जोकि हर साल लाखों लोगों की मौत की वजह बनता है। इससे यह पता चलता है कि कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शरीर को ऊर्जा देने के लिए जरूरी हैं।
वहीं पहले के कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि ऐसी डाइट शरीर में एलडीएल को बढ़ाती है। यह शरीर से अतिरिक्त फैटी पदार्थ और धमनियों में जमा चर्बी को कम कर सकती है। लेकिन नई रिसर्च में इस बात का संकेत मिला है कि जिन लोगों को पहले से हार्ट संबंधी बीमारी हैं, उनके लिए यह डाइट गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है।
शोधकर्ताओं ने जांच में यह समझने का प्रयास किया कि क्या किसी व्यक्ति के जेनेटिक्स ऐसा संकेत दे सकते हैं कि उसके लिए लो कार्ब डाइट फायदेमंद रहेगी। इसलिए 600 से ज्यादा वयस्कों के ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
जिन लोगों ने हेल्दी लो कार्ब या हेल्दी लो फैट डाइट फॉलो की थी, उनमें वेट लॉस के मामले में दोनों डाइट से एक्सपर्ट को कुछ खास लाभ नहीं दिखा।
वहीं कुछ प्रतिभागियों के सैचुरेटेड फैट वाली डाइट, जेनेटिक डेटा और छह महीने में बैड कोलेस्ट्रॉल में होने वाले बदलावों को समझने का प्रयास किया।
इसमें यह पाया गया कि जिन लोगों में आनुवांशिक रूप से एलडीएल बढ़ता था, उनमें लो-कार्ब डाइट लेने के दौरान बैड कोलेस्ट्रॉल में ज्यादा बढ़त पाई गई।
हालांकि इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ लोग कार्बोहाइड्रेट कम करते समय चीज और रेड मीट जैसे ज्यादा फैट वाली चीजें खाने लगते हैं।
एक्सपर्ट की मानें, तो किसी व्यक्ति को रोजाना कुल कैलोरी में सैचुरेटेड फैट की मात्रा 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
वहीं पुरुषों के लिए रोज अधिकतम सिर्फ 30 ग्राम सैचुरेटेड फैट और महिलाओं के लिए सिर्फ 20 ग्राम इसकी मात्रा रखने की सलाह देते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट हेल्थ को ठीक रखने के लिए डाइट में सैचुरेटेड फैट कम करें और इसकी जगह ओमेगा 2 और अनसैचुरेटेड फैट को बढ़ाएं। वहीं किसी दूसरे की डाइट के फायदों को देखकर खुद से कोई डाइट नहीं शुरू करनी चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट से सेहत की जांच कराएं और फिर उसी के आधार पर डाइट लें।