इंदौर को 'छोटा मुंबई' भले कहा जाता हो मगर यह शहर सफाई में सबसे आगे है

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Aug 24, 2020

मुझे गर्व है कि इंदौर को लगातार चौथी बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है। मुझे दिल्ली में बसे 55 साल हो गए लेकिन इंदौर में जन्म के बाद जो 21 साल कटे, वे अद्भुत थे। लगभग 50 साल पहले जब मैं अपनी पीएच.डी. के शोध के लिए लंदन और वाशिंगटन जा रहा था तो एक मित्र के आग्रह पर आस्ट्रिया की राजधानी वियना में भी एक सप्ताह रुका। वहां एक सड़क पर एक सरदारजी ने मुझे देखा और पूछा कि ‘‘तुम इंदौर में ही रहते हो, न ?’’ मैंने कहा, ‘‘मैं आजकल दिल्ली में रहता हूं। मैं इंदौर में नहीं रहता हूं लेकिन इंदौर मुझमें रहता है।’’ हम इंदौरियों की राय यह है कि जो आदमी एक बार इंदौर में रह गया, वह कभी इंदौर को भूल नहीं पाता।

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इंदौर के नमकीन और मिठाइयों ने सारी दुनिया के प्रवासी भारतीयों को सम्मोहित कर रखा है। भारत के मध्य क्षेत्र में इंदौर-जैसा मालदार शहर कोई और नहीं है। इंदौर की खूबियां इतनी हैं कि उनका जिक्र इस छोटे-से लेख में नहीं हो सकता। इंदौर के मालवी लोगों को ‘घर-घुस्सू’ कहा जाता है याने वे मालवा छोड़कर कहीं जाना ही नहीं चाहते। मालवा में न ज्यादा ठंड पड़ती है और न ही ज्यादा गर्मी! इस मौसम ने मालवी लोगों के मन को भी अपने रंग में रंग दिया है। इसीलिए मालवा-क्षेत्र में सांप्रदायिक और जातीय दंगे बहुत कम होते हैं। वहां एक-दूसरे की लिहाज़दारी गज़ब की होती है। परस्पर विरोधी नेता भी एक-दूसरे का बड़ा ख्याल रखते हैं।

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इंदौर में आंदोलन करते हुए मुझे कई बार जेलों में भी रहना पड़ा लेकिन वहां भी किसी ने कोई दुर्व्यवहार किया हो, ऐसा याद नहीं पड़ता। इंदौर के आस-पास की पहाड़ियों, नदियों, तालाबों और बगीचों से ऐसा खुशनुमा माहौल बना रहता है कि जैसे कोई ईश्वरीय महफिल सजी हुई है। भारत तथा हमारे पड़ौसी देशों के शहर भी इंदौर-जैसे या उससे भी बढ़िया बन जाएं, क्या यह आप नहीं चाहेंगे ?

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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