Kolathur Election Dispute: मद्रास हाईकोर्ट ने MK Stalin की याचिका खारिज की, EVM गड़बड़ी के दावे बेअसर

By अभिनय आकाश | Sep 03, 2026

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रेसिडेंट एमके स्टालिन को गुरुवार को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा, जिसने कोलाथुर असेंबली सीट पर उनकी चुनावी हार को लेकर उनकी अर्जी खारिज कर दी। यह ऑर्डर दो जजों की बेंच ने पास किया, जिसमें कहा गया कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री की अर्जी मेंटेनेबल नहीं है। कोलाथुर स्टालिन का गढ़ रहा था, लेकिन वह हाल ही में हुए तमिलनाडु असेंबली इलेक्शन में तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) लीडर वीएस बाबू से करीब 8,000 वोटों के मार्जिन से हार गए। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) के मुताबिक, स्टालिन को 74,202 (40.32 परसेंट) वोट मिले, जबकि बाबू को 82,997 (45.09 परसेंट) वोट मिले।

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स्टालिन ने कोलाथुर नतीजों में अनियमितता का आरोप लगाया

अपनी याचिका में, स्टालिन ने कहा कि 14 चयनित ईवीएम सेटों के लिए कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपीएटी (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) में जली हुई मेमोरी/माइक्रोकंट्रोलर की जांच और सत्यापन के लिए वरिष्ठ वकील एनआर एलंगो को उनके अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में नामित किया गया था। उनकी चेकिंग के दौरान ही अनियमितताएं पाई गईं। बाद में एलांगो ने जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) को पत्र लिखा। हालाँकि, डीईओ ने घोषणा की थी कि जाँच और सत्यापन सफलतापूर्वक किया गया था और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार 5 अगस्त को पूरा किया गया था। 

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स्टालिन ने मद्रास HC का रुख किया

6 अगस्त को उन्होंने डीईओ को पत्र लिखकर सामने आई विशिष्ट विफलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इंजीनियर द्वारा जारी प्रमाणपत्र विफलताओं के कारणों को समझाने वाली तकनीकी/विफलता रिपोर्ट का विकल्प नहीं हो सकते हैं और न ही होंगे।

उन्होंने डीईओ के दावे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मद्रास उच्च न्यायालय में चले गए, यह कहते हुए कि उनके द्वारा मांगे गए किसी भी स्पष्टीकरण और उठाई गई आपत्तियों का जवाब दिए बिना विवादित आदेश यांत्रिक रूप से पारित किया गया है। हालाँकि, मुख्य न्यायाधीश एसए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने दिन में उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह सुनवाई योग्य नहीं है।

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