125 करोड़ का इनामी माफिया मरा, पूरा देश घुटनों पर ला दिया, Trump का क्या रोल था?

By अभिनय आकाश | Feb 24, 2026

गाड़ियां धू-धू कर जल रही हैं। आसमान में धुएं का गुबार है। एयरपोर्ट्स पर भगदड़ मची है। देश के 20 राज्यों में ऐसा कोहराम है। मंजर देख मालूम पड़ता है कि बगावत हो गई हो। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह आग एक खूंखार माफिया के एनकाउंटर के बाद भड़की है। 5 फुट 8 इंच का आदमी, उम्र 59 साल, वजन लगभग 75 किलो। भूरी आंखें, भूरे बाल। आपने फोन पर अगर स्पॉटिफाई खोलकर इस शख्स का नाम सर्च किया तो आपको इस पर कई मैक्सिकन गाने बने मिल जाएंगे। नाम क्या है? नेमेसियो रूबेन, ओसेग्वेरा, सर तेज़। दुनिया इसे एलेंचो के नाम से जानती है। एक पार्टी में एक गुर्गे ने दूसरे पर गलती से गुड़हल की चाय गिरा दी। इतनी सी बात पर छिड़ गया गैंग वॉर और खून खराबे से पैदा हुआ मुर्गों का सरदार। खौफ इतना कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने इसके गिरोह को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। नौबत यहां तक आ गई थी कि अमेरिका ने उसके देश में अपनी सेना घुसाने और हवाई हमले करने की धमकी दे दी थी।

पहले थोड़ा इतिहास-भूगोल समझ लेते हैं

कहते हैं ज्योग्राफी इज डेस्टिनी। भूगोल ही नियति है। मेक्सिको के साथ ऐसा ही है। इसका भूगोल ड्रग्स के कारोबार के लिए परफेक्ट है। जहां अमेरिका की दक्षिणी सीमा खत्म होती है, वहां से शुरू होता है मेक्सिको। इसका दक्षिण पूर्वी हिस्सा पूंछ की तरह समंदर में आगे बढ़ता हुआ ग्वाटरमाला से जुड़ता है। पूंछ आगे बढ़े तो निकारागुआ, कोस्टारिका और पनामा पार करके बसा है वेनेजुएला। वही देश जहां के राष्ट्रपति को उनकी पत्नी सहित उठाकर अमेरिकी फौज ने जेल में डाल दिया था।  यह पूरा बेल्ट ड्रग्स के कच्चे माल और उसकी सप्लाई का मेन रूट है। मेक्सिको का उत्तरी बॉर्डर नॉर्दन बाउंड्री अमेरिका से लगती है। अवैध तरीके से अमेरिका में घुसने की चाहत रखने वाले लोग इसी बॉर्डर का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका में पहुंचने वाले ज्यादातर इललीगल ड्रग्स इसी बॉर्डर से सप्लाई होते हैं। 

कौन था एल मैचो? 

एल मेंचो 17 जुलाई 1966 को एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था। परिवार की आय का प्रमुख स्रोत एवोकाडो की खेती था। वह सिर्फ पांवीं क्लास तक पढ़ा था। 14 साल की उम्र से ही मारिजुआना के खेतों की रखवाली करने लगा। 1980 में वह अवैध रूप से अमेरिका चला गया, जहां ड्रग्स से जुड़े मामलों में पकड़ा गया। तीन साल की सजा काटी और फिर डिपोर्ट होकर मेक्सिको लौटा। मैक्सिको लौटने के बाद छोटे शहरों काबो कोरिएंटेस और तोमाट्लान में लोकल पुलिस अधिकारी के रूप में काम किया। इसी दौरान उसने कानून व्यवस्था की कमजोरियों, घूस सिस्टम और सिक्योरिटी ऑपरेशंस के बारे में सब सीखा। जल्द ही नौकरी छोड़कर ड्रग ट्रैफिकिंग में पूरी तरह उतर गया उसकी उम्र 59 साल थी। वह पुलिस अधिकारी भी रह चुका था। 2011 के आसपास अपना गैंग बनाया था। मेक्सिको दुनिया के सबसे बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का गढ़ माना जाता है। 

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125 करोड़ का इनामी माफिया कैसे हुआ ढेर

22 फरवरी को मेक्सिको की सेना ने जेलिस्को राज्य के तपालपा शहर में एक खुफिया ऑपरेशन चलाया। इसमें अमेरिका ने भी खुफिया जानकारी देकर मदद की थी। इंटेलिजेंस में सहायता की। इस एनकाउंटर में एलमेंचो बुरी तरह घायल हुआ। उसे इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से मेक्सिको सिटी यानी जो उसकी राजधानी है वहां ले जाया जा रहा था। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। कारवाही में उसके गिरोह के नौ गुर्गे भी मारे गए। एल्मेंचो की मौत की खबर बाहर आते ही उसके गुर्गों ने पूरे देश में तांडव शुरू कर दिया। 

अमेरिका से क्या है संबंध? 

इस कार्टेल की मौजूदगी पूरे बना रहे थे। मेक्सिको अमेरिका में है। अमेरिका ने एल मैचो पर 136 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप काफी समय से मेक्सिको पर एल मेचो पर ऐक्शन लेने का दबाव से कोकेन, हेरोइन, मेथ और फेटेनाइल जैसे बेहद खतरनाक ड्रग्स अमेरिका तक पहुंचते हैं। अमेरिकी एजेंसियों के मुताबिक देश में ड्रग्स की सबसे बड़ी सप्लाई मेक्सिकन कार्टेल्स के जरिए होती है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के मेक्सिको एनालिस्ट डेविड मोरा के मुताबिक, यह कार्रवाई शेनबाम सरकार की कार्टेल के खिलाफ सख्ती और अमेरिका के दबाव दोनों के लिहाज से टर्निंग पॉइंट है। 'एल मैचों' के रिश्तेदार कार्टेल की कमान लेते हैं तो हिंसा जारी रह सकती है। विशेषज्ञ 1990 के दशक में कोलंबिया में कार बम, हत्याएं और विमानों पर हमले जैसा इतिहास दोहराने की आशंका जता रहे।

कितना खतरनाक है ड्रग माफिया का यह ग्रुप ? 

जेलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल के पास मशीन गन, टैंक और बॉडी आर्मर से लैस ग्रुप्स है। कार्टेल के पास AK-47 और M-80 जैसे असॉल्ट राइफलों का जखीरा है। यह ग्रुप इतना ताकतवर था कि इसने रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड से सेना के एक हेलिकॉप्टर को गिरा दिया था। कार्टेल कभी-कभी लोगों को मारकर उनके शवों को पुलों से लटकाने के लिए भी जाना जाता है। 2015 में एल मैचो के कार्टेल ने रकिट से सेना का हेलिकॉप्टर मार गिराया। ऐसा दुस्साहस पहले किसी कार्टेल ने नहीं दिखाया था। इसके बाद 2020 में मैक्सिको सिटी के सुरक्षा प्रमुख पर हमला करवा दिया। सीजेएनजी के सरगना और सदस्यों को बिल्कुल सेना की तरह ट्रेनिंग मिलती थी। पूरे संगठन का ढांचा भी इसी तर्ज पर था। ऑनलाइन भर्तियां करता था। अन्य सरगनाओं की तरह मीडिया में दिखने या इंटरव्यू देने से बचता था। अन्य कार्टल से अलग अमेरिका के अलावा यूरोप, एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया तक नेटवर्क फैलाया। इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली आपराधिक नेटवर्क में गिना जाता है। कई राज्यों में पूरी प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी कर ली थी। विरोधियों को चुप कराने के लिए बच्चों तक की हत्या करने से नहीं चूके। एक शहर में 35 लोगों की हत्या कर उनके शव सार्वजनिक स्थान पर फेंकवा दिया।

भारत, अमेरिका और कनाडा ने सतर्क रहने को कहा

यह ऑपरेशन मैक्सिकन स्पेशल फोर्सेज ने किया, जिसमें अमेरिका से खुफिया जानकारी मिली। भारत, अमेरिका और कनाडा ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। यह मैक्सिको का सबसे पुराना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे संगठित ड्रग नेटवर्क माना जाता है, जिसकी जड़ें प्रशांत तट और अमेरिका तक फैली हैं। 

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