Mahadev Govind Ranade Death Anniversary: कांग्रेस के 'पितामह' थे महादेव गोविंद रानाडे, जानिए क्यों कहलाए Justice Ranade

By अनन्या मिश्रा | Jan 16, 2026

भारत की स्वतंत्रता के लिए न जाने कितने ही लोगों ने अपना बलिदान दिया है। ऐसे ही एक समाज सुधारकों में से एक महादेव गोविंद रानाडे का नाम भी शामिल है। आज ही के दिन यानी की 16 जनवरी को महादेव गोविंद रानाडे का निधन हो गया था। उन्होंने समाज सुधार के लिए कई काम किए हैं। महादेव गोविंद रानाडे को 'जस्टिस रानाडे' के नाम से भी जाना जाता है। महादेव गोविंद रानाडे समाज सुधारक और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर महादेव गोविंद रानाडे के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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बॉम्बे हाई कोर्ट के जज

रानाडे ने भारतीय भाषाओं को बंबई यूनिवर्सिटी के सिलेबस में शामिल किया। उनकी योग्यता की वजह से उनको बॉम्बे स्मॉल कॉज कोर्ट में प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। फिर साल 1893 तक वह बॉम्बे हाईकोर्ट के जज नियुक्त किए गए थे।

इतिहास के ट्रेनर

वहीं एलफिंस्टन कॉलेज में गोविंद रानाडे को इतिहास के ट्रेनर के रूप में नियुक्त किया गया था। जिसकी वजह से उनमें भारतीय इतिहास विशेषरूप से मराठा इतिहास में विशेष रुचि विकसित हुई। इसी के चलते रानाडे ने साल 1900 में 'राइज ऑफ मराठा पावर' नाम की पुस्तक लिखी थी। इतिहास में विशेषज्ञता के कारण रानाडे हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि भारतीयों में इतिहास के प्रति संवेदनशीलता की काफी कमी है।

समाज सुधार के प्रयास

महादेव गोविंद रानाडे का झुकाव हिंदू धर्म के आध्यात्मिक पक्ष की तरफ ज्यादा था। वह मूर्ति पूजा और कर्म-कांडों में विश्वास नहीं रखते थे। रानाडे धर्म से लेकर शिक्षा तक भारतीयों में प्रगतिशील सुधार देखना चाहते थे। रानाडे ने बाल विवाह, ट्रांस-समुद्री यात्रा पर जाति प्रतिबंध, शादी धूमधाम से करने और विधवा मुंडन जैसी तमाम बुराइयों का जमकर विरोध किया था। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा पर विशेष कार्य करते हुए महाराष्ट्र कन्या शिक्षा समाज की स्थापना की थी।

राजनीतिक गतिविधि

बता दें कि रानाडे ने 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' की स्थापना का समर्थन किया था। साल 1885 में उन्होंने कांग्रेस के प्रथम मुंबई अधिवेशन में भाग लिया। राजनीतिक सम्मेलनों के साथ सामाजिक सम्मेलनों के आयोजन का श्रेय रानाडे को जाना है। वह सिर्फ सामाजिक सुधार के लिए पुरानी रुढ़ियों को तोड़ना काफी नहीं मानते थे। उनका कहना था कि रचनात्मक कार्य से ही यह संभव हो सकता है।

मृत्यु

वहीं 16 जनवरी 1901 को महादेव गोविंद रानाडे का पुणे में निधन हो गया था।

आज ही के दिन 16 जनवरी 1901 को समाज सुधारक और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक महादेव गोविंद रानाडे का पुणे में निधन हो गया। वे एक समाज सुधारक थे, जिन्होंने बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई लड़ी, शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के माध्यम से महिलाओं के उत्थान पर काम किया।

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