पहले से ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में लौट रहे हैं फडणवीस और खट्टरः प्रभासाक्षी एग्जिट पोल

By नीरज कुमार दुबे | Oct 21, 2019

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए मतदान संपन्न हो गया और अब सबकी नजरें 24 अक्तूबर को आने वाले परिणाम पर लग गयी हैं। बड़े-बड़े टीवी समाचार चैनलों और बड़ी-बड़ी एजेंसियों की ओर से कराये जाने वाले एक्जिट पोल के नतीजों के बीच भारत का प्रमुख हिन्दी समाचार पोर्टल प्रभासाक्षी भी लाया है आपके सामने सबसे सटीक एक्जिट पोल (Exit Polls)। इस एक्जिट पोल के परिणाम हमारी टीम द्वारा महाराष्ट्र और हरियाणा के विभिन्न इलाकों में जाकर आम जनता से की गयी बातचीत पर आधारित हैं। तो आइए ज्यादा घुमा-फिरा कर बातें करने की बजाय सीधे आपके मन में उठ रहे सवालों के जवाब पर आते हैं-

महाराष्ट्र में 288 सीटों के लिए कुल 3237 उम्मीदवारों का राजनीतिक भाग्य ईवीएम में कैद हो गया है। यहां विधानसभा चुनावों में 8.97 करोड़ मतदाता थे। महाराष्ट्र के स्थानीय मुद्दों की बात करें तो कुछ समय पहले राज्य के विभिन्न इलाकों में आई बाढ़ के चलते पैदा हुए हालात, पीएमसी बैंक घोटाला, देश की आर्थिक स्थिति, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी आदि बड़े मुद्दे थे। महाराष्ट्र को क्षेत्रवार देखें तो यहां मुंबई की 60 सीटों पर आर्थिक मंदी, आवास की समस्या, परिवहन के साधनों जैसे मेट्रो ट्रेन का मुद्दा आदि प्रमुख थे लेकिन यहां विपक्ष बेहद कमजोर नजर आया। खासकर चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस और एनसीपी के बड़े नेताओं ने जो पाला बदल किया उससे भगवा गठबंधन बेहद मजबूत हो गया। शिवसेना ने तो अपनी युवा शाखा के प्रमुख आदित्य ठाकरे को मुंबई की वर्ली सीट से चुनाव लड़ाने का अहम फैसला कर पार्टी की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया। 

मराठवाड़ा की बात करें तो यहां की 46 सीटों पर किसानों की नाराजगी सबसे बड़ा मुद्दा थी लेकिन जल संरक्षण को लेकर देवेंद्र फडणवीस सरकार ने जो कार्य किये हैं उसका असर यहां पर दिख रहा है। यह बात जरूर है कि कार्यों की गति भले धीमी है लेकिन काम हो रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में यहां जो बिखराव हुआ उसका सीधा फायदा भाजपा और शिवसेना गठबंधन को होने जा रहा है।

विदर्भ की 62 सीटों की बात करें तो 50 सीटें फिलहाल भगवा खेमे के पास हैं। यहां पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता काफी ज्यादा है क्योंकि पिछले पांच वर्षों में उन्होंने यहां कई विकास के काम किये हैं। मुख्यमंत्री इस क्षेत्र के लिए जो निवेश लेकर आये हैं उससे इस क्षेत्र के भाग्य के द्वार खुल गये हैं।

पश्चिम महाराष्ट्र को शुगर बेल्ट के रूप में देखा जाता है। यहां से विधानसभा के लिए 70 सीटें हैं। कांग्रेस और एनसीपी का गढ़ रहे इस इलाके में भगवा खेमे ने चुनावों से पहले सेंधमारी कर दी और बड़ी संख्या में नेताओं का दल बदल हुआ। 

नॉर्थ महाराष्ट्र को देखें तो यहां की 35 विधानसभा सीटों में से 21 सीटों पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन का कब्जा है। इन चुनावों में भी विपक्ष यहां कोई बड़े मुद्दे लाकर सरकार को घेरने में विफल रहा है।

कोंकण में विधानसभा की 15 सीटें हैं और शिवसेना के इस गढ़ में एनसीपी भी अपनी खोई हुई ताकत दोबारा हासिल करने के लिए काफी मेहनत कर रही है।

अब एक्जिट पोल की बात करें तो महाराष्ट्र में एक बार फिर देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाला भाजपा-शिवसेना गठबंधन सत्ता में लौटता दिख रहा है। यह स्थिति तब है जबकि 37 विधानसभा सीटों पर भाजपा-शिवसेना के बागी उम्मीदवार एक दूसरे के खिलाफ चुनाव में खड़े हैं। भगवा गठबंधन की सत्ता में वापसी तो हो रही है उससे भी बड़ी खास बात यह है कि 2014 के विधानसभा चुनावों में अकेले चुनाव लड़ कर 122 सीटों पर जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी इस बार गठबंधन के साथ मैदान में उतरने के बावजूद अकेले 140 सीटों पर जीत हासिल करती दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि भाजपा ने विधानसभा की कुल 288 में से 164 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। शिवसेना की बात करें तो 2014 में अकेले चुनाव लड़कर वह 63 सीटें जीतने में सफल रही थी जबकि इस बार वह अपना आंकड़ा 90 तक पहुँचा सकती है। शिवसेना ने गठबंधन के तहत 124 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। विधानसभा में बहुमत के लिए 145 सीटें चाहिए। भाजपा-शिवसेना युति में शामिल सभी दल मिलकर 230 सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं और इस तरह राज्य से विपक्ष का पूरी तरह सफाया होने जा रहा है। दूसरी ओर यदि कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की बात करें तो कांग्रेस ने भी पिछला विधानसभा चुनाव अकेले लड़ कर 42 सीटों पर और एनसीपी ने अकेले चुनाव लड़कर 41 सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन इस बार इन दोनों पार्टियों के गठबंधन के 50 सीटों पर सिमट जाने के आसार हैं। इस तरह कुल मिलाकर देखें तो नयी विधानसभा की स्थिति यह रहने वाली है-

भाजपा-शिवसेना- 230

कांग्रेस-एनसीपी- 50

अन्य- 8

हरियाणा

अब बात कर लेते हैं दिल्ली से सटे राज्य हरियाणा की। देश की सेना में जवानों की संख्या में सर्वाधिक योगदान देने वाले इस राज्य में विधानसभा चुनावों में जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ईमानदार छवि मुद्दा थी तो वहीं विपक्षी खासकर कांग्रेस के नेता आपस में ही लड़ते रहे जिसका जनता में गलत संदेश गया। चुनाव मैदान में कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवारों से मुकाबला कर रहे थे तो पार्टी उम्मीदवारों के नीचे से जमीन खिसकाने के लिए पार्टी के ही धड़े काम कर रहे थे। हमने जब राज्य के विभिन्न इलाकों का दौरा किया तो यही पाया कि भाजपा जहां एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है वहीं कांग्रेस विभिन्न धड़ों में बंटी दिखी। भाजपा उम्मीदवारों के कार्यालय जहां मुख्य मार्गों पर नजर आये वहीं कांग्रेस उम्मीदवारों के कार्यालय अधिकतर जगह ढूंढ़ने पड़े। गांवों के लोगों में यही भावना थी कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जवानों का मारा जाना बंद हो गया है साथ ही सरकारी नियुक्तियों में भ्रष्टाचार भी बंद हो गया है।

यहां भी विधानसभा चुनावों से पहले बड़ी संख्या में दल बदल हुआ और कांग्रेस तथा इंडियन नेशनल लोकदल के कई विधायक भाजपा के साथ आ गये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भाजपा का मोर्चा संभाला तो कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी स्टार प्रचारक रहे। जब प्रभासाक्षी की टीम ने हरियाणा का दौरा कर उम्मीदवारों के बारे में आम लोगों से चर्चा की तो यह भी पता लगा कि कुछ सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के प्रति नाराजगी है क्योंकि वह उस क्षेत्र के नहीं हैं लेकिन कुल मिलाकर लोग खट्टर सरकार को एक और मौका देने के मूड़ में दिखे। जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चौटाला ने सभी 90 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार कर मजबूत टक्कर दी और सभी क्षेत्रों में इस पार्टी के उम्मीदवार पैसे वाले दिखे। इंडियन नेशनल लोकदल और अकाली दल ने मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन कोई खास प्रभाव छोड़ पाने में यह पार्टी ज्यादा असरकारी साबित होती नहीं दिख रही है। इसी प्रकार बहुजन समाज पार्टी भी अधिकतर इलाकों में वोट कटुवा पार्टी के रूप में ही नजर आई। आम आदमी पार्टी ने पिछले पांच साल में तो यहां काफी धरने प्रदर्शन किये लेकिन चुनावों से पहले उसने यहां से अपना कामकाज एक तरह से समेट लिया क्योंकि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल सहित कोई भी बड़ा नेता यहां प्रचार के लिए नहीं आया। 

हरियाणा में भाजपा ने पिछली बार 47 सीटों पर जीत हासिल की थी और इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 70 के पार जा सकता है। यहां पर भाजपा ने चुनावों में 'अबकी बार 75 पार' का नारा दिया था हो सकता है यह नारा सच साबित हो जाये। कांग्रेस और अन्य दल एक बुरी हार का सामना करने जा रहे हैं और पिछले चुनावों में 15 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस 10 सीटों के नीचे भी जा सकती है। कुल मिलाकर हरियाणा के चुनाव परिणाम का आकलन करें तो यह इस प्रकार रहने वाला है-

भाजपा- 70 से 75

कांग्रेस- 8 से 10

अन्य- 02-05

खैर...यह तो थे अनुमानित चुनाव परिणाम। असल परिणाम क्या होंगे, जनादेश क्या है यह तो 24 तारीख को ही पता चलेगा। लेकिन हम आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए प्रभासाक्षी का एग्जिट पोल लगभग सटीक साबित हुआ था।

-नीरज कुमार दुबे

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