Maharashtra के 265 तालुके सूखा प्रभावित घोषित, किसानों के लिए राहत उपायों का ऐलान

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 26, 2026

महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को यानी करीब तीन चौथाई हिस्से को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राहत उपायों की घोषणा की, जिनमें फसल ऋण नियमों को आसान बनाने, भू-राजस्व में छूट और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल है। सरकार तय प्रक्रिया के बाद फसल के नुकसान के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी। इस बीच, पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि लातूर जिले की शिरूर अनंतपाल तहसील में, बारिश की कमी से फसल के नुकसान और कर्ज के कारण एक किसान ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिलाधिकारियों को फसल के नुकसान का आकलन तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया है और भरोसा दिलाया है कि सूखे की स्थिति में सरकार की राहत कोशिशों के केंद्र में किसान ही रहेंगे। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली वास्तविक आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा। राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016’ (2020 में अद्यतन) और ‘सूखा प्रबंधन संहिता’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ कदम लागू किया है।

‘ट्रिगर-1’ राज्य के सूखा प्रबंधन ढांचे का पहला चरण है। इसे तब लागू किया जाता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से ज़्यादा की कमी हो और 21 दिन तक लगातार सूखे (बिना बारिश वाला समय) का दौर रहे। कृषि आयुक्त की एक रिपोर्ट में पाया गया कि जून से बारिश कम होने और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकों की संख्या सबसे ज्यादा (74) है; इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है। सूची में रायगढ़ का एक, रत्नागिरि के तीन और सिंधुदुर्ग के आठ तालुका भी शामिल हैं। सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन शुरू करें और फसल की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए सर्वेक्षण वाले इलाकों की तस्वीरें तथा जीपीएस अवस्थिति के आंकड़े एकत्र करें।

ये रिपोर्ट कृषि आयुक्त के जरिए सरकार को सौंपी जानी हैं। सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण नियमों को सुगम करना, खेती से जुड़े ऋण की वसूली को टालना और खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में छूट आदि शामिल है। सरकारी आदेश में कहा गया कि 7.5 हॉर्सपॉवर तक के खेती पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ़ कर दिए गए थे और नयी घोषित छूट प्रभावित इलाकों में इससे ज़्यादा क्षमता वाले पंपों पर लागू होगी।

इन उपायों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क को माफ करना, ज़्यादा से ज़्यादा काम उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के नियमों में ढील देना, ज़रूरत पड़ने पर पानी के टैंकर भेजना और पानी की कमी वाले गांवों में खेती के पंपों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति करना शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार, खेती पर निर्भर किसानों और मज़दूरों के लिए अनाज और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का इंतजाम भी किया जाएगा। सरकार ने कहा कि जल संरक्षण के काम और लोगों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।

कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि अधिकारी सटीक और पारदर्शी पंचनामा (फसल-नुकसान का सर्वे) करेंगे, तुरंत फसल-कटाई के प्रयोग करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को फसल बीमा और सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिले। इस बीच, लातूर में पुलिस उपाधीक्षक आकाश जाधव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सूखे के हालत और कर्ज से प्रभावित अंकुश रमेश काले (33) नाम के किसान ने शुक्रवार को जिले के डोंगरगांव बोरी गांव में अपने खेत में अपनी जान दे दी। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा, “काले पर लातूर ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक का 40,000 रुपये और भारतीय स्टेट बैंक का एक लाख रुपये का कर्ज़ था।

बारिश न होने के कारण उनकी फ़सलें बर्बाद हो गई थीं, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।” विपक्षी दलों ने आपात स्थिति में प्रक्रिया की जरूरत पर सवाल उठाए और किसानों के लिए वित्तीय सहायता की समयसीमा और राशि की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मांग की कि सरकार आने वाले दशहरा और दिवाली त्योहारों को देखते हुए, सूखा राहत के तौर पर किसानों के बैंक खातों में प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये जमा करे और पंचनामा बाद में करे। उन्होंने रबी के मौसम के लिए कर्ज माफी, मुफ्त बीज और खाद, जानवरों के लिए पर्याप्त चारा और दाना, छात्रों की पढ़ाई की फीस पूरी तरह माफ करने और खेतिहर मजदूरों के लिए अलग से आर्थिक मदद की मांग की।

राकांपा (शप) के महासचिव महेश तपासे ने सूखे से राहत के पैकेज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मुआवजा देने का काम खेतों के सर्वे पूरे होने तक टाल दिया गया है। शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को अब राहत उपायों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर प्रभावित किसान को मदद मिले।

सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र का दौरा कर रहे ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा, “चाहे इसमें (सूखा घोषित करने में) देरी हुई हो या इसे कब घोषित किया जाना चाहिए था... हम लगातार मांग कर रहे थे कि सूखा पहले घोषित किया जाए। महाराष्ट्र से पहले कर्नाटक ने इसे घोषित कर दिया।” उन्होंने कहा, “अब जब इसकी घोषणा हो चुकी है, तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सूखे से राहत के पूरे पैकेज के तहत दी जाने वाली हर मदद हर किसान को मिले।” उन्होंने कहा, “इस सूखे या सुपर अल नीनो का असर न सिर्फ़ खेती-बाड़ी के क्षेत्र पर, बल्कि शहरी इलाकों पर भी पड़ेगा। इससे पूरा महाराष्ट्र और देश प्रभावित होगा।” किसान सभा ने मांग की कि लगातार दो खरीफ सत्रों में फसल खराब होने से प्रभावित किसानों को ठोस आर्थिक मदद दी जाए, जिसमें कर्ज माफी और फसल बीमा कवरेज के आधार पर मुआवजा शामिल हो।

अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। जून से 18 सितंबर तक वास्तविक वर्षा 755.9 मिमी हुई, जबकि औसत बारिश 932.3 मिमी होती है।

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