By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 28, 2026
महाराष्ट्र के ठाणे जिले से मुंबई स्थित राज्य सचिवालय की ओर विभिन्न मांगों को लेकर पदयात्रा कर रहे हजारों आदिवासियों ने अधिकारियों को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्रवाई में तेजी लाने का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद अपना आंदोलन वापस ले लिया। श्रमजीवी संगठन के संस्थापक विवेक पंडित के नेतृत्व में ‘संविधान हक संघर्ष मोर्चा’ के तहत मंगलवार दोपहर ठाणे के भिवंडी से करीब 49,000 लोग मुंबई के लिए रवाना हुए थे। प्रदर्शनकारी ठाणे, पालघर, रायगढ़ और नासिक से आए थे।
आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए काम करने वाले श्रमजीवी संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आदिवासी समुदायों की शिक्षा, वन अधिकार, पुनर्वास, जलापूर्ति और आधार पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करें और कार्रवाई में तेजी लाएं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं ठाणे के प्रभारी मंत्री एकनाथ शिंदे देर रात ठाणे पहुंचे।
उन्होंने खारीगांव टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और उन्हें उनकी मांगों के समाधान के लिए जारी किए गए कई शासकीय आदेशों (जीआर) की जानकारी दी। शिंदे ने कहा कि उन्होंने एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में शासकीय आदेश जारी होते पहले कभी नहीं देखे। उन्होंने इसे प्रदर्शनकारियों और उनके नेतृत्व की जीत बताया।
उन्होंने इन आदेशों की प्रतियां पंडित को सौंपीं, जिसके बाद आदिवासियों ने मार्च रोक दिया। इससे पहले, मंगलवार को हुई बैठक के दौरान फडणवीस ने कहा था कि श्रमजीवी संगठन और समर्थन संगठन को ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिपत्र को तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आदिवासी विद्यार्थियों को मुफ्त ट्यूशन और पर्याप्त छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने, आश्रम या आवासीय विद्यालयों में खाली पद भरने तथा जिला परिषद के विद्यालयों में कक्षाओं, लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालयों और खेल सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं।
वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र दावों के निपटारे के लिए 15 दिसंबर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि ग्राम स्तरीय समितियों से मंजूरी प्राप्त सभी पात्र व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों का निपटारा किया जाए और कोई भी दावा लंबित न रहे।