TMC सांसद Mahua Moitra पहुंचीं UN, Amit Shah के दौरों में मुस्लिम अफसरों से भेदभाव का आरोप

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 17, 2026

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरों के दौरान, वरिष्ठ मुस्लिम आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को उनके धर्म की वजह से आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर रखा गया। मोइत्रा ने कुछ दिन पहले, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उत्तर बंगाल में शाह के कार्यक्रमों से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के मुस्लिम अधिकारियों को दूर रखा गया।

अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा नियुक्त किया जाता है। उनका काम वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना, बाधाओं की पहचान करना तथा राष्ट्रीय, जातीय, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना है। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि इन (आईएएस और आईपीएस) अधिकारियों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया, जबकि दूसरे धर्म के उनके सहकर्मियों को उस दौरान उपस्थित रहने की इजाजत दी गई।

मोइत्रा ने पत्र में कहा, ‘‘इन तीनों अधिकारियों में एक बात समान है, और यही बात उन्हें उन सहकर्मियों से अलग करती है जिन्हें कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहने की इजाजत दी गई थी -- और वह है उनका धर्म।’’ तृणमूल सांसद ने दावा किया कि जिन अधिकारियों को कथित तौर पर बाहर रखा गया, उनकी मौजूदगी केंद्रीय गृह मंत्री के दौरों के दौरान आधिकारिक प्रोटोकॉल और सरकारी कामकाज के संचालन से जुड़ी हुई थी। मोइत्रा ने पूर्व में आरोप लगाया था कि जब शाह मौजूद थे, तो वकार रजा को स्वागत करने वाले समूह में शामिल होने से रोक दिया गया था, जबकि जावेद शमीम को केंद्रीय मंत्री की भागीदारी वाले कार्यक्रमों में नहीं बुलाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि खलील अहमद को एक बैठक से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया था।

‘पीटीआई-भाषा’ मोइत्रा के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर सकी है। मोइत्रा ने इन कथित घटनाओं को ‘‘जानबूझकर बाहर रखने’’ का एक पैटर्न बताया और कहा कि इस तरह के व्यवहार से पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों में अल्पसंख्यक समुदायों के विश्वास और सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने अपनी शिकायत में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रावधानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कथित व्यवहार भेदभावपूर्ण है।

मोइत्रा ने यह भी तर्क दिया कि (मुस्लिम अधिकारियों को) कथित तौर पर (आधिकारिक कार्यक्रमों से) बाहर रखा जाना इसलिए भी मायने रखता है कि शाह केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रमुख हैं, जिसके तहत कई केंद्रीय पुलिस, सीमा और खुफिया एजेंसियां आती हैं। तृणमूल नेता ने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से आग्रह किया कि (अल्पसंख्यक अधिकारियों को आधिकारिक कार्यक्रमों से) कथित तौर पर बाहर रखने के कारणों और इसके पीछे के प्राधिकार के बारे में भारत सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया कि किसी भी अधिकारी को धर्म के आधार पर आधिकारिक कार्यक्रमों से बाहर न रखा जाए तथा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ​​बिना किसी भेदभाव के अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करें।

उन्होंने शाह के दौरों से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, यात्रा डायरी और अन्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की भी मांग की। मोइत्रा ने संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र विशेषज्ञ से अनुरोध किया गया कि वह अपने अधिकार-क्षेत्र के तहत उपयुक्त लगने वाली कोई भी अन्य कार्रवाई करें।

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