By Ankit Jaiswal | May 31, 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। दोनों देशों ने एआई और सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी कंपनियों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई है। माना जा रहा है कि इससे तकनीकी विकास, निवेश और विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने कुछ वर्ष पहले महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया था। अब एआई और सेमीकंडक्टर तकनीक को इस साझेदारी के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया जा रहा है। हालिया चर्चाएं दोनों देशों के बीच ट्रस्ट पहल के तहत हुई हैं, जिसे फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान औपचारिक रूप दिया गया था।
बता दें कि ट्रस्ट पहल के तहत दोनों देश कई तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। इसमें एआई, सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा केंद्र, साइबर सुरक्षा और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार भारत में बड़े स्तर पर एआई आधारित ढांचे के निर्माण के लिए वित्तपोषण, ऊर्जा आपूर्ति और तकनीकी संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिका भारत में नई पीढ़ी के डेटा केंद्रों में निवेश और उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने को लेकर विशेष रुचि दिखा रहा है। इसके अलावा एआई के लिए आवश्यक संगणन क्षमता और प्रोसेसर तक पहुंच बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने विदेशी एआई कंपनियों को अपने राष्ट्रीय चैंपियन कार्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस पहल के तहत चयनित देशों की प्रमुख एआई कंपनियों को अमेरिकी तकनीकी संसाधनों और निर्यात ढांचे से जोड़ा जाएगा।
यह कार्यक्रम फरवरी में आयोजित भारत एआई प्रभाव सम्मेलन के दौरान शुरू किया गया था। पिछले महीने अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने उद्योग समूहों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। अधिकारियों के अनुसार भारत सरकार ने भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की इच्छुक भारतीय कंपनियों से सुझाव मांगे हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की गई है।
बता दें कि बैठकों के दौरान 25 करोड़ डॉलर के पैक्स सिलिका बीज कोष पर भी चर्चा हुई है। इस कोष का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज, अवसंरचना और विनिर्माण परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देना है। अमेरिका को उम्मीद है कि इस पहल के जरिए एक लाख करोड़ डॉलर से अधिक परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाले वैश्विक निवेशकों और संप्रभु कोषों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार भारत इस कोष की भागीदारी को सेमीकंडक्टर और उससे जुड़े आगामी परियोजनाओं में आकर्षित करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में देश की भूमिका मजबूत होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता तकनीकी सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सुरक्षित, भरोसेमंद और विविध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना भी है। आने वाले वर्षों में एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख आधार बनने की संभावना है।