By अभिनय आकाश | Sep 24, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गौतम बुद्ध नगर की ज़िला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम से जुड़े मामले में अपने आदेश में बदलाव किया और साफ़ किया कि छात्रा आकृति चौधरी को उनकी हिरासत के मामले में मिली राहत पर कोई रोक नहीं है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें DM रूपम को अप्रैल में नोएडा में हुए मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत छात्रा को हिरासत में लेने के लिए अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था। बुधवार को बेंच ने कहा कि मामले के गुण-दोष के आधार पर विचार होने तक, हाई कोर्ट के फ़ैसले खासकर पैराग्राफ 27 से 33—के अमल पर रोक लगी रहेगी। अदालत ने आदेश दिया, पक्षों के सीनियर वकीलों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत का मानना है कि जब तक मामले पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक विवादित फ़ैसले खासकर पैराग्राफ 27 से 33—के अमल पर रोक लगी रहेगी।
इसमें यह भी कहा गया था कि नौकरशाहों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी "वफ़ादारी संविधान के प्रति है, न कि राजनीतिक कार्यपालिका के प्रति" और सरकारी अधिकारी जनता की सेवा करते हैं, जो लोकतंत्र में मालिक होती है। यह मामला नोएडा के उन कर्मचारियों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है जो ज़्यादा वेतन की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ़्तार किए गए कई कार्यकर्ताओं में चौधरी और एक्टिविस्ट-पत्रकार सत्य वर्मा भी शामिल थे। इसके बाद, 13 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन दोनों पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा दिया।