TCS को US Supreme Court से बड़ा झटका, Trade Secret केस में देना होगा करोड़ों का हर्जाना।

By Ankit Jaiswal | Jun 16, 2026

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को अमेरिका में एक लंबे कानूनी विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनी की अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद वर्षों से चल रहा यह मामला लगभग समाप्त हो गया है। इस फैसले के साथ कंपनी पर करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की संभावना बढ़ गई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को इस मामले में लगभग 22 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कुल वित्तीय प्रभाव झेलना पड़ सकता है। कंपनी ने बताया है कि उसे 7 करोड़ अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त एकमुश्त प्रावधान करना होगा। इससे पहले भी कंपनी इस मामले से जुड़े वित्तीय प्रावधान कर चुकी है।

इस विवाद की शुरुआत अमेरिका के जीवन बीमा सॉफ्टवेयर कारोबार से हुई थी। डीएक्ससी टेक्नोलॉजी की पहले की कंपनी कंप्यूटर साइंसेज कॉरपोरेशन ने 1990 के दशक में ट्रांसअमेरिका नामक बीमा कंपनी को अपना विशेष जीवन बीमा सॉफ्टवेयर लाइसेंस पर उपलब्ध कराया था। बाद में आरोप लगाया गया कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने ट्रांसअमेरिका से 2200 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की और उनके माध्यम से उस सॉफ्टवेयर तथा उससे जुड़ी गोपनीय जानकारी का उपयोग करते हुए एक प्रतिस्पर्धी प्लेटफार्म तैयार किया था।

गौरतलब है कि कंप्यूटर साइंसेज कॉरपोरेशन, जो बाद में डीएक्ससी टेक्नोलॉजी का हिस्सा बन गई, ने वर्ष 2019 में डलास की एक संघीय अदालत में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। कंपनी का आरोप था कि भारतीय कंपनी ने व्यापारिक गोपनीय जानकारियों का अनुचित लाभ उठाया है। हालांकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज किया था। कंपनी का कहना था कि संबंधित जानकारी गोपनीय नहीं थी और सॉफ्टवेयर तक उसकी पहुंच पूरी तरह वैध थी।

मामले में बड़ा मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब जूरी ने यह निष्कर्ष निकाला कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने जानबूझकर व्यापारिक गोपनीय जानकारियों का दुरुपयोग किया है। जूरी ने 21 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की सिफारिश की थी। हालांकि यह सिफारिश बाध्यकारी नहीं थी, लेकिन इसे डीएक्ससी टेक्नोलॉजी की बड़ी कानूनी जीत माना गया था।

इसके बाद वर्ष 2024 में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रैंटली स्टार ने हर्जाने की राशि घटाकर 16.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर कर दी थी। इस राशि में 5.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का प्रतिपूरक हर्जाना और 11.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का दंडात्मक हर्जाना शामिल था।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन वर्ष 2025 में अमेरिकी पांचवें सर्किट अपीलीय न्यायालय ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद कंपनी अंतिम उम्मीद के तौर पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय पहुंची थी।

कंपनी का तर्क था कि डीएक्ससी टेक्नोलॉजी वास्तविक वित्तीय नुकसान साबित नहीं कर सकी है, इसलिए इतनी बड़ी हर्जाना राशि उचित नहीं है। वहीं डीएक्ससी का कहना था कि निचली अदालतों ने कानून के अनुसार फैसला दिया है और मामले में किसी अतिरिक्त समीक्षा की जरूरत नहीं है।

अब सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपील स्वीकार न किए जाने के बाद 16.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर का फैसला प्रभावी रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय रूप से यह राशि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनी के लिए संभालने योग्य हो सकती है, लेकिन इससे कंपनी की वैश्विक छवि और भरोसे पर असर पड़ने की आशंका भी बनी हुई है। विशेष रूप से बौद्धिक संपदा और व्यापारिक गोपनीयता से जुड़े मामलों को प्रौद्योगिकी उद्योग में बेहद संवेदनशील माना जाता है।

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