Supreme Court का बड़ा फैसला, Homemakers को 'राष्ट्र निर्माता' मानकर 30,000 रु. मासिक मुआवज़ा

By अभिनय आकाश | Jun 11, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने घर संभालने वाली महिलाओं को 'राष्ट्र निर्माता' माना और बिना पैसे वाले घरेलू काम की आर्थिक अहमियत को स्वीकार किया। एक अहम फ़ैसले में, शीर्ष अदालत ने कहा कि घरेलू देखभाल सेवाओं के नुकसान को 'मुआवज़े का एक अलग आधार' माना जाना चाहिए और मोटर दुर्घटना के दावों में ऐसे नुकसान का आकलन करने के लिए 30,000 रुपये की अनुमानित मासिक आय तय की। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि घर संभालने वालों का योगदान सिर्फ़ घर के कामों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और अंततः देश को बनाने में भी उनकी अहम भूमिका होती है।

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घर की देखभाल न मिल पाने के लिए अलग से मुआवज़ा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'घर की देखभाल न मिल पाने' (loss of domestic care) को मुआवज़े के एक अतिरिक्त और स्वतंत्र आधार के तौर पर माना जाना चाहिए। बेंच ने ऐसे नुकसान का आकलन करने के लिए 30,000 रुपये प्रति महीने की न्यूनतम काल्पनिक आय तय की। यह तरीका घर संभालने वालों की कड़ी मेहनत की तुलना कुशल और अकुशल मज़दूरों की न्यूनतम मज़दूरी से करने की परंपरा से निकला है।

यह फ़ैसला पंजाब में मोटर दुर्घटना के दावे से जुड़ी एक अपील के बाद आया, जिसमें एक मृतक होममेकर का परिवार दो दशकों से ज़्यादा समय से मुआवज़े की कोशिश कर रहा था। ऐसे मामलों में देरी पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना के दावों के मामलों का फ़ैसला आम तौर पर एक साल के भीतर हो जाना चाहिए और उम्मीद जताई कि सभी हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस इनके समय पर निपटारे पर नज़र रखेंगे।

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