By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 29, 2026
भारत में 2015 से 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और इससे होने वाली मौतों में करीब 80 प्रतिशत की कमी आई है तथा मलेरिया से अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 155 से घटकर 33 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि 2022 से 2025 के दौरान 160 जिलों में स्थानीय स्तर पर मलेरिया का एक भी मामला सामने नहीं आया जो स्थानीय संक्रमण पर लगातार अंकुश और मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए उठाए गए लक्षित कदमों के असर को दर्शाता है।
देश में 2025 में सामने आए मलेरिया के कुल मामलों में से 64 प्रतिशत मामले और इससे हुई कुल मौतों में से 54 प्रतिशत मौत इन्हीं जिलों में हुईं। बैठक में मिजोरम, ओडिशा, त्रिपुरा, असम, आंध्र प्रदेश, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। पटनायक ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि मलेरिया को दोबारा फैलने से रोकने और इसके उन्मूलन में तेजी लाने के लिए लगातार सतर्कता तथा अलग-अलग क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीति अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने मलेरिया से अधिक प्रभावित सभी 33 जिलों में जिला कार्य योजनाओं और मलेरिया के खतरे वाले गांवों में ग्राम कार्य योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय महामारी संबंधी और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उपाय किए जाने चाहिए। बैठक में ‘‘जांच, उपचार और निगरानी’’ की रणनीति को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
मलेरिया से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में जांच और इलाज में देरी को भी चिह्नित किया गया। राज्यों को सक्रिय निगरानी बढ़ाने और खासकर दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जांच सुविधाओं और मलेरिया रोधी दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की सलाह दी गई। बैठक में निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और मलेरिया से संबंधित आंकड़ों की गुणवत्ता बेहतर करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
पटनायक ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि केवल स्वास्थ्य संबंधी उपाय अपनाकर जलभराव, मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को खत्म करने और पर्यावरण प्रबंधन जैसे उन कारकों से नहीं निपटा जा सकता जो मलेरिया फैलने में भूमिका निभाते हैं। राज्यों को पर्यावरण प्रबंधन और मच्छर नियंत्रण संबंधी कदमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ग्रामीण विकास एवं शहरी विकास विभागों के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं से समन्वय मजबूत करने की सलाह दी गई।